तेलंगाना से उठी आवाज, ‘ऑपरेशन कगार’ बंद करे सरकार
छत्तीसगढ़ में चल रहे माओवाद विरोधी अभियान के बीच तेलंगाना में शांतिवार्ता
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के ख़िलाफ़ सुरक्षाबलों के अब तक के सबसे बड़े अभियान ‘ऑपरेशन जीरो’ की धमक छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे देश में बनी हुई है. हज़ारों की संख्या में जवानों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित आश्रय स्थल बताए जाने वाले कर्रेगुट्टा पहाड़ को घेर रखा है.
लेकिन इन अभियानों के बीच ही मानवाधिकार संगठन सरकार से शांति वार्ता की अपील कर रहे हैं और अब तेलंगाना ने भी सरकार से अभियान रोकने की बात कही है.
छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा "ऑपरेशन जीरो" जारी है. कर्रेगुट्टा, दुर्गमगुट्टा और पुजारी कांकेर की पहाड़ियों में जारी इस अभियान की चर्चा चारों ओर है.
माओवादी शांति वार्ता का प्रस्ताव दे रहे हैं, लेकिन भीषण गर्मी के बीच, 40 डिग्री से ऊपर के तापमान में, जवान लगातार ऑपरेशन में डटे हुए हैं.
अभियान के पांचवे दिन जवान एक माओवादी ठिकाने तक पहुंचने में सफल रहे थे, जहां एक बड़ी गुफा को कब्जे में लिया गया.
इससे चार दिन पहले एक मुठभेड़ के बाद तीन महिला माओवादियों के शव भी बरामद किए गए. लेकिन ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल के जवान डंटे हुए हैं. ड्रोन और हेलीकॉप्टर से इलाके की निगरानी की जा रही है.
इस दौरान छत्तीसगढ़ के नागरिक संगठनों के बाद अब तेलंगाना से भी राजनीतिक दलों ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस अभियान को रोकने की अपील की है.
द कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन सीएएसआर, तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव केसीआर व वर्तमान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से शांति समिति के सदस्यों ने मुलाकात कर, वार्ता के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है.आदिवासी मारे जा रहे हैं
वहीं सीएएसआर ने एक प्रेस बयान में "ऑपरेशन कगार" और माओवाद प्रभावित इलाकों में इस तरह के अभियानों को तुरंत रोकने की मांग की है. उन्होंने केंद्र सरकार से प्रतिबंधित माओवादी पार्टी के साथ बातचीत का माहौल बनाने की भी अपील की है.
बयान में यह भी कहा गया है कि पिछले डेढ़ साल में केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की संयुक्त कार्रवाइयों के कारण आदिवासी बहुल इलाकों में लगातार मुठभेड़ें हो रही हैं.
सीएएसआर का आरोप है कि इन अभियानों में आदिवासी मारे जा रहे हैं और यह नरसंहार जैसा है.
बयान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा माओवादी उग्रवाद खत्म करने की समय-सीमा 31 मार्च 2026 का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यह सैन्य केंद्रित सोच है, जबकि डी. बंद्योपाध्याय समिति जैसे कई सरकारी आकलनों ने इसे सामाजिक-राजनीतिक समस्या बताया है.
सीएएसआर ने बताया कि कई वरिष्ठ अधिकारी, जैसे कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक, भी यह मानते हैं कि केवल बल प्रयोग से समाधान नहीं निकलेगा, जब तक कि सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को नहीं सुलझाया जाए.
ऑपरेशन तुरंत बंद करे सरकार- केसीआर
इधर तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर ने भी ऑपरेशन कगार को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इससे निर्दोष आदिवासियों की मौत हो रही है और सरकार को इसे तुरंत बंद करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि नक्सली बातचीत को तैयार हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही. KCR ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी इस ऑपरेशन को रोकने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजेगी.
मुख्यमंत्री रेड्डी से हस्तक्षेप की अपील
वहीं, शांति समिति के सदस्यों- जस्टिस चंद्रकुमार, प्रो. हरगोपाल, प्रो. अनवर खान और दुर्गा प्रसाद ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात कर इस अभियान को रोकने के लिए हस्तक्षेप की अपील की.
यह मुलाकात कांग्रेस नेता जना रेड्डी से बातचीत के बाद हुई, जो पहले राज्य के गृह मंत्री रह चुके हैं और 2004 में माओवादियों से बातचीत में शामिल रहे हैं.
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने समिति को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे पर जना रेड्डी से चर्चा करेंगे और केंद्र सरकार से बातचीत की पहल करने पर विचार करेंगे.
निर्दोष आदिवासी पिस रहे
हालांकि इस बीच पिछले कुछ दिनों में माओवादी कम से कम 3 बार शांति वार्ता का प्रस्ताव दे चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि माओवादी अभी दबाव बनने के कारण इस तरह के प्रस्ताव दे रहे हैं.
वे किसी भी कीमत पर संवैधानिक दायरे में बातचीत के लिए तैयार नहीं होंगे. लेकिन जानकारों का यह भी कहना है कि सुरक्षाबलों और माओवादियों की लड़ाई में निर्दोष आदिवासियों को किसी तरह का नुकसान न हो, यह सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए.
फिलहाल तेलंगाना से आई अपील पर सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस आक्रमक मुद्रा में अपना अभियान जारी रखा है, उससे लगता नहीं है कि ऐसी किसी अपील का बहुत असर, माओवादियों के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान पर होगा.