उत्तराखंड में आदमखोर तेंदुए को वन विभाग ने गोली मारी
पौड़ी गढ़वाल । डेस्क: उत्तराखंड के पौड़ी गरवाल जिले के बारा क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने एक तेंदुए को गोली मार दी. विभाग का दावा है कि यही तेंदुआ पिछले महीने एक नेपाली मजदूर की मौत के लिए जिम्मेदार था.
गढ़वाल के प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि पहले तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे और जाल लगाए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली. मानव जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंततः उसे मारने का निर्णय लिया गया.
गौरतलब है कि पिछले महीने भी पौड़ी के डोभाल धांदरी क्षेत्र में वन विभाग ने एक तेंदुए को मार गिराया था. उस तेंदुए ने एक व्यक्ति की जान ली थी और एक महिला को घायल किया था.
राज्य वन विभाग के अनुसार जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच 85 जंगली जानवर जिनमें 62 तेंदुए और 23 भालू शामिल हैं मानव बस्तियों में भटककर पहुंचे. विभाग 34 तेंदुओं को पिंजरे में कैद करने में सफल रहा, जबकि एक भी भालू को नहीं पकड़ा जा सका.
1 जनवरी से 12 फरवरी के बीच इन हमलों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे पहाड़ी जिलों में दहशत का माहौल है.
उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने दो दिन पहले पौड़ी गढ़वाल प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के ठोस उपायों की मांग की थी. पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी ने कहा कि पिछले तीन महीनों में जिले में तेंदुओं ने चार लोगों को मार डाला और आधा दर्जन से अधिक को घायल किया है.
उन्होंने कहा, “ग्रामीणों में भय का माहौल है. कई तेंदुए गांवों में घूम रहे हैं. केवल मार देना समाधान नहीं है. सरकार को समझना होगा कि जानवर जंगल छोड़कर भोजन की तलाश में बाहर क्यों आ रहे हैं.”
नेगी ने जंगलों और पहाड़ों के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने की मांग की और कहा कि यदि वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित महसूस करेंगे तो वे बस्तियों की ओर नहीं आएंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्रामीणों को सर्चलाइट वितरित करने की मांग को सरकार ने नजरअंदाज कर दिया. Symbolic Photo