अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हवाई हमले, क्या कहते हैं दूसरे देश
तेहरान/वाशिंगटन/यरूशलेम । डेस्क: शनिवार सुबह संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के भीतर कई ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है. इन हमलों के जवाब में ईरान ने उन खाड़ी देशों पर जवाबी मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर गहरा डर पैदा कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है.
संयुक्त राज्य अमेरिका
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि अमेरिका "ईरानी शासन से खतरों को खत्म करने" के उद्देश्य से एक "बड़े सैन्य अभियान" में शामिल है. ट्रम्प ने ईरान के मिसाइल उद्योग और उसकी नौसेना को नष्ट करने का संकल्प लिया और ईरानी जनता से अपनी सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया.
इजरायल
इजरायल के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया कि यह हमला महीनों से नियोजित था. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान द्वारा उत्पन्न "अस्तित्व के खतरे" को दूर करना है. उन्होंने कहा कि इससे ईरानी लोगों को अपना भाग्य खुद तय करने की स्थिति मिलेगी.
ईरान
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया. ईरान ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं. ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी कि अब इस क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली हितों के लिए कोई "रेड लाइन" नहीं बची है.
हिजबुल्लाह
लेबनान के हिजबुल्लाह ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया. उन्होंने ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त की और क्षेत्रीय देशों से इस "आक्रामक योजना" का डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया.
संयुक्त राष्ट्र
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सैन्य वृद्धि की निंदा करते हुए तत्काल युद्धविराम की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि बल का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय शांति को कमजोर करता है. सुरक्षा परिषद ने इस मुद्दे पर शनिवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई है.
यूरोपीय संघ
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.
रेड क्रॉस
रेड क्रॉस की अध्यक्ष मिर्जना स्पोलजारिक ने युद्ध के नियमों का सम्मान करने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी दी कि एक "खतरनाक सैन्य श्रृंखला" शुरू हो गई है, जिसके नागरिकों के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं.
ओमान
प्रमुख मध्यस्थ ओमान ने इस हिंसा पर निराशा जताई है. विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी ने वाशिंगटन से और अधिक न उलझने का आग्रह किया. ओमान ने सुरक्षा परिषद से तुरंत हस्तक्षेप कर युद्धविराम लागू करने की मांग की है.
जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन (E3)
एक संयुक्त बयान में तीनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने क्षेत्र में ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिक जीवन की सुरक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई. ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटिश विमान रक्षात्मक अभियानों के लिए आसमान में हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने इसे सभी के लिए खतरनाक बताया.
कतर
कतर के विदेश मंत्रालय ने अपनी भूमि (अल उदेद एयर बेस) पर ईरानी मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि कतर के पास अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
UAE ने ईरानी हमलों को "कायरतापूर्ण कार्य" बताया. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया. उन्होंने इसे एक खतरनाक वृद्धि करार दिया है.
बहरीन
बहरीन ने पुष्टि की कि ईरानी मिसाइलों ने अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय को निशाना बनाया है. उन्होंने इस हमले को "विश्वासघाती" बताया है.
कुवैत
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अपनी मिट्टी पर हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का "घोर उल्लंघन" करार दिया और चेतावनी दी कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और गहरी होगी.
सऊदी अरब
सऊदी अरब ने खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों की "कड़े शब्दों में" निंदा की है और इसके "गंभीर परिणामों" की चेतावनी दी है.
तुर्किए
तुर्किए ने हिंसा के इस चक्र को समाप्त करने का आह्वान किया. तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने रेखांकित किया कि हिंसा की शुरुआत ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों से हुई थी, जो अब पूरे क्षेत्र के भविष्य को खतरे में डाल रही है.
पाकिस्तान
विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान के खिलाफ हमलों की निंदा की और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया.
रूस
रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने हमले की तैयारी के लिए ईरान के साथ परमाणु वार्ता को एक "कवर-अप" (दिखावे) के रूप में इस्तेमाल किया. दिमित्री मेदवेदेव ने इसे गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई बताया.
चीन
चीन ने सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकने और ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की है. उन्होंने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान पर जोर दिया है.
भारत
भारत के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से "संयम बरतने" और "वृद्धि से बचने" का आग्रह किया है. भारत ने जोर दिया कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है और सभी राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.
यूक्रेन
यूक्रेन ने इस संघर्ष के लिए ईरान को ही जिम्मेदार ठहराया है. यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरानी शासन द्वारा अपने ही लोगों पर किए गए अत्याचार और हिंसा ने ही आज इन स्थितियों को जन्म दिया है.
नॉर्वे
विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ने कहा कि इजरायल का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि "निवारक हमले" के लिए तत्काल खतरे का होना आवश्यक है.
बेल्जियम
विदेश मंत्री मैक्सिम प्रीवोट ने खेद व्यक्त किया कि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं रहे. उन्होंने कहा कि सरकार के फैसलों की कीमत ईरानी जनता को नहीं चुकानी चाहिए.