चीनी सबमरीन केबल्स पर US कड़ाई: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) ने वैश्विक इंटरनेट और डेटा ट्रांसफर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सबमरीन (समुद्र के भीतर) कम्युनिकेशंस केबल्स की निगरानी को और सख्त करने का मन बना लिया है. रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी संघीय संचार आयोग ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा है जिसके तहत चीनी कंपनियों के लिए उपकरण आपूर्ति करना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
वहीं दूसरी ओर, भरोसेमंद अमेरिकी तकनीकी फर्मों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को तेज (फास्ट-ट्रैक) करने की योजना है.
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने चीनी सबमरीन केबल कंपनियों को निशाना बनाया है. पिछले साल भी अमेरिकी संघीय संचार आयोग ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानी जाने वाली कंपनियों के उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी.
अब नए नियमों के जरिए इस प्रतिबंध के दायरे को और व्यापक बनाने की तैयारी है, जिसमें चीन या किसी भी अन्य 'विदेशी प्रतिद्वंद्वी' के उपकरणों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम वैश्विक डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए चिंताजनक है.
अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल आज के समय में वैश्विक व्यापार, क्लाउड कंप्यूटिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. दुनिया का अधिकांश डेटा ट्रैफिक इन्हीं के जरिए संचालित होता है.
इस उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका निर्माण और रखरखाव किसी एक देश के बस की बात नहीं है. फाइबर प्रीफॉर्म्स से लेकर गहरे समुद्र में केबल बिछाने और उनके लंबे समय तक रखरखाव तक, यह पूरा सेक्टर एक बेहद जटिल और आपस में जुड़ी ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर करता है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि समुद्र के भीतर बिछने वाली केबल पूरी तरह नागरिक उपयोग के लिए बुनियादी ढांचा हैं, जो वैश्विक साइबर कनेक्टिविटी से जुड़ी हैं. चीन का आरोप है कि अमेरिका सुरक्षा के बहाने विशुद्ध रूप से वाणिज्यिक सहयोग को राजनीतिक रंग दे रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार के नियमों का उल्लंघन है.
इस फैसले का खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ सकता है. वर्तमान में अमेरिका एआई, 5जी नेटवर्क और डेटा सेंटर्स के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल अपग्रेड के दौर से गुजर रहा है.
ऐसे में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को ब्लॉक करने से अमेरिकी परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी और काम की रफ्तार धीमी होगी. हालांकि, एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग से अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे साफ है कि एक देश के प्रतिबंधों से वैश्विक डिजिटल प्रगति नहीं रुकेगी.
अमेरिकी प्रतिबंधों के इस फैसले का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक और गहरा असर पड़ने की आशंका है.
सबमरीन केबल नेटवर्क वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लाइफलाइन हैं, जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन, शेयर बाजारों, क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्लाउड डेटा को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पलक झपकते ही ट्रांसफर करते हैं.
जब अमेरिका सुरक्षा के नाम पर स्थापित चीनी आपूर्तिकर्ताओं को इस अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से बाहर करेगा, तो नए केबल प्रोजेक्ट्स की लागत काफी बढ़ जाएगी और उनके पूरा होने में भी देरी होगी.
इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में इंटरनेट और डेटा ट्रांसफर की गति प्रभावित हो सकती है, जिससे डिजिटल सेवाओं के दाम बढ़ेंगे.
टेक सेक्टर में इस तरह की 'डिजिटल जंग' से वैश्विक टेक मार्केट दो गुटों में बंट सकता है, जिससे न केवल डेटा प्रवाह बाधित होगा बल्कि विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग कमजोर होने से वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो सकती है.