त्विशा शर्मा केस: सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार
भोपाल । डेस्क: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने गुरुवार 28 मई, 2026 को भोपाल की सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को उनकी बहू त्विशा शर्मा की दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें स्थानीय अदालत से मिली अग्रिम जमानत को रद्द किए जाने के कुछ ही घंटों बाद की गई.
सीबीआई की टीम सुबह ही गिरिबाला सिंह के भोपाल स्थित आवास पर पहुंच गई थी, जहां करीब छह घंटे की लंबी पूछताछ और जांच के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.
इससे पहले, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने त्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और राज्य सरकार की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 15 मई को भोपाल सत्र अदालत द्वारा जारी अग्रिम जमानत के आदेश को खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए गंभीर टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने कहा कि मृतका के शरीर पर चोट के छह निशान पाए गए हैं, जिनमें से एक सिर की चोट 'एंटीमॉर्टम' (मृत्यु से पहले की) थी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं, जिसे निचली अदालत ने जमानत देते समय पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया.
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जिस तरह आनन-फानन में अग्रिम जमानत ली गई, उससे निचली अदालत के फैसले पर संदेह पैदा होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही थीं और कानून का मजाक उड़ा रही थीं.
वहीं, सीबीआई की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु और पीड़ित पक्ष के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि आरोपी ने पूर्व न्यायाधीश होने के नाते अपने कानूनी व क्राइम सीन मैनेजमेंट के अनुभवों का इस्तेमाल सबूतों और घटनाक्रम से छेड़छाड़ करने के लिए किया. मामले की जांच 25 मई को ही भोपाल पुलिस की एसआईटी से सीबीआई को सौंपी गई थी, जबकि मृतका के पति समर्थ सिंह पहले से ही सीबीआई की हिरासत में हैं.