ट्रंप की नई कूटनीति और यूरेनियम संवर्धन की तकनीकी जंग
नई दिल्ली । डेस्क: वर्तमान वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में परमाणु हथियारों की होड़ और कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही संकेत दिए हैं कि वे ईरान के साथ एक ऐसा नया परमाणु समझौता करना चाहते हैं जो 2015 के ऐतिहासिक 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (JCPOA) से कहीं बेहतर और कठोर होगा. गौरतलब है कि 2018 में ट्रंप ने ही अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका को इस पुराने समझौते से बाहर कर लिया था.
इस्लामाबाद वार्ता और अमेरिका की कड़ी शर्तें
ताजा घटनाक्रम में ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे दो सप्ताह के युद्धविराम को उसकी समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले बढ़ा दिया है, जिससे पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता के दूसरे दौर की संभावनाओं को मजबूती मिली है. वाशिंगटन की ओर से इस वार्ता में सबसे प्रमुख शर्त यह है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे. ईरान का दावा है कि उसका कार्यक्रम बिजली उत्पादन और चिकित्सा जैसे नागरिक उद्देश्यों के लिए है, जिसके लिए केवल 3-5% संवर्धन चाहिए, जबकि हथियार के लिए 90% शुद्धता अनिवार्य है.
यूरेनियम का विज्ञान: 'येलोकेक' से परमाणु गैस तक का सफर
यूरेनियम एक अत्यंत सघन और प्राकृतिक रूप से रेडियोधर्मी धातु है. जमीन से निकाले जाने के बाद इसे कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले 'येलोकेक' बनाया जाता है, फिर इसे 'ग्रीन साल्ट' और अंततः 'यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड' गैस में बदला जाता है. संवर्धन का मुख्य लक्ष्य U-235 की सांद्रता को बढ़ाना है. इसके लिए हजारों सेंट्रीफ्यूज मशीनों का उपयोग किया जाता है, जो एक सेकंड में एक हजार से अधिक बार घूमकर भारी और हल्के आइसोटोप्स को अलग करती हैं.
खतरे की घंटी: परमाणु बम से कितनी दूर है ईरान?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईरान परमाणु बम बनाने के बहुत करीब पहुंच चुका है. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास 60% तक संवर्धित लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम है. प्रोफेसर टेड पोस्टोल का अनुमान है कि 60% से 90% (हथियार श्रेणी) तक पहुंचने में ईरान को अब केवल चार से पांच सप्ताह का समय लग सकता है. चिंताजनक यह है कि ईरान ने अपनी इन क्षमताओं को गहरी भूमिगत सुरंगों में छिपा रखा है और आधुनिक मशीनों को बहुत कम जगह में भी संचालित किया जा सकता है.
NPT की सीमाएं और कूटनीतिक गतिरोध का इतिहास
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक की अनुमति तो देती है, लेकिन बम बनाने की नहीं. 2015 में ईरान अंतरराष्ट्रीय जांच के दायरे में था, लेकिन 2018 में अमेरिका के हटने और जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या जैसी घटनाओं ने स्थिति बिगाड़ दी. हालिया तनाव के बीच, अब ईरान ने सद्भावना के रूप में अपने 60% भंडार को 20% तक 'डाउनब्लेंड' करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे विशेषज्ञ एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं.
वैश्विक शक्ति संतुलन और परमाणु हथियारों का भविष्य
2026 की शुरुआत तक दुनिया के नौ देशों के पास कुल 12,187 परमाणु वारहेड हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है. जहाँ दक्षिण अफ्रीका ने अपने हथियार नष्ट कर दिए, वहीं इजरायल 'परमाणु अस्पष्टता' की नीति अपनाए हुए है. इस्लामाबाद की वार्ता यह तय करेगी कि ट्रंप प्रशासन अपनी शर्तें मनवा पाता है या मध्य-पूर्व में एक नया परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र उभरता है. यह लड़ाई अब केवल विज्ञान नहीं, बल्कि वैश्विक अस्तित्व और शक्ति संतुलन का सबसे बड़ा हथियार बन गई है.