ट्रंप के भाषण के दौरान इजरायली संसद 'नेसेट' में हंगामा
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इजरायल की संसद 'नेसेट' में भाषण शुरू होते ही हंगामा हो गया. गाजा में शांति स्थापित करने की पहल को 'ऐतिहासिक भोर' बताते हुए जब ट्रंप ने अपना संबोधन शुरू किया, तो दो विद्रोही सदस्यों ने विरोध करना शुरू कर दिया.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वामपंथी सदस्य आयमन ओदेह और ओफर कैसिफ अचानक खड़े हो गए और चिल्लाने लगे. उनके हाथों में 'फिलिस्तीन को मान्यता दो' और 'जनसंहार' जैसे नारे वाले प्लेकार्ड थे. सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की और स्थिति बिगड़ने से पहले ही दोनों सदस्यों को खींचकर 'नेसेट' से बाहर कर दिया गया.
स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रंप ने फिर से अपना भाषण शुरू किया और सुरक्षाकर्मियों की 'दक्षता' की प्रशंसा की.
ट्रंप ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने और शांति बहाल करने का दावा किया है, जिसे इजरायल ने भी मान्यता दी है. उनके इजरायल पहुंचने से पहले हमास ने दो चरणों में 20 जीवित इजरायली बंधकों को रिहा कर दिया था. इजरायल ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों ने गाजा में युद्धविराम का श्रेय ट्रंप को दिया है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे.
सोमवार को इजरायल पहुंचने पर ट्रंप का जोरदार स्वागत हुआ. तेल अवीव में जनता ने उनके नाम पर 'जय ध्वनि' दी. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें 'नेसेट' में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था.
नेतन्याहू ने ट्रंप की प्रशंसा करते हुए घोषणा की कि इजरायल अगले साल अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने के लिए दुनिया भर में अभियान चलाएगा. उन्होंने शांति प्रयासों के लिए ट्रंप को इजरायल के सर्वोच्च पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया और उन्हें सोने का कबूतर भेंट किया.
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, "अब आकाश शांत है. बंदूकों की आवाज थम गई है. पवित्र भूमि पर शांति आई है." हालांकि, उनका भाषण तब बाधित हुआ जब आयमन ओदेह और ओफर कैसिफ ने फिलिस्तीन को मान्यता देने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया.
हँगामा शुरू होते ही ट्रंप मंच पर रुक गए. स्पीकर अमीर ओहाना ने पूरी घटना के लिए ट्रंप से माफी मांगी, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना भाषण जारी रखा.