ट्रम्प का दावा: उनका मुख्य लक्ष्य "जीवन बचाना" है
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य विश्व भर में "जीवन बचाना" है. इसके लिए वह भारत-पाकिस्तान जैसे वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता कर रहे हैं.
फॉक्स न्यूज के साथ हालिया साक्षात्कार में ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव को कम कर परमाणु संघर्ष को रोका. हालांकि, भारत ने उनके इस दावे को बार-बार खारिज किया है, जबकि पाकिस्तान ने ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की बात कही है.
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष में 60 से अधिक लोग मारे गए और हजारों विस्थापित हुए. यह तनाव 22 अप्रैल को पहलगांव की बैसरण घाटी में 26 पर्यटकों की आतंकी हमले में हत्या के बाद शुरू हुआ. इसके जवाब में, भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी शिविरों पर हमला किया, जिसमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए. पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई की, जिसे भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया.
10 मई को पाकिस्तान ने भारत के साथ युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, जिसे भारत ने स्वीकार किया. ट्रम्प ने दावा किया कि यह युद्धविराम उनकी मध्यस्थता का परिणाम था. भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि युद्धविराम पूरी तरह द्विपक्षीय था.
ट्रम्प की वैश्विक शांति की छवि
ट्रम्प ने न केवल भारत-पाकिस्तान, बल्कि थाईलैंड-कंबोडिया, ईरान-इज़राइल, रवांडा-कांगो, सर्बिया-कोसोवो, और मिस्र-इथियोपिया जैसे अन्य संघर्षों को रोकने का श्रेय लिया है. ह्वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रम्प ने अपने छह महीने के कार्यकाल में हर महीने औसतन एक शांति समझौता या युद्धविराम करवाया. ट्रम्प ने स्वयं कहा, "पहला लक्ष्य जीवन बचाना है. युद्ध बहुत बुरा है."
पाकिस्तान ने ट्रम्प को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की घोषणा की है, जबकि भारत ने इसे अमेरिका का ध्यान आकर्षित करने की रणनीति करार दिया.
ट्रम्प का असली मकसद?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प अपनी छवि को एक वैश्विक शांति दूत के रूप में स्थापित करना चाहते हैं. उनकी 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट में वह खुद को "शांति के राष्ट्रपति" कहते हैं. हालांकि, भारत द्वारा उनके दावों को खारिज करने और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ अलास्का शिखर वार्ता की विफलता ने उनकी मंशा पर सवाल उठाए हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प के ये प्रयास नोबेल पुरस्कार की महत्वाकांक्षा या व्यापारिक और कूटनीतिक लाभ से प्रेरित हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, ट्रम्प ने हाल ही में भारत पर 25% और पाकिस्तान पर 19% आयात शुल्क लगाया है.
भारत ने दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ उसका युद्धविराम द्विपक्षीय था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून में ट्रम्प के साथ फोन पर बातचीत में भी यही बात कही. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 'ऑपरेशन सिंदूर' को स्वतंत्र कार्रवाई बताया.