ईरानी हमलें से बचने के लिये ट्रंप ने कैटरिंग कंटेनर में छिपकर विमान बदला
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान से मिले गंभीर सुरक्षा खतरे के चलते उनके तुर्की दौरे के दौरान एक बेहद गोपनीय और नाटकीय सुरक्षा अभियान चलाना पड़ा था. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उनके आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' को महज एक छलावे के रूप में इस्तेमाल किया, जबकि ट्रंप खुद एक छोटे सैन्य विमान से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए.
यह पूरी घटना तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के बाद की है. सार्वजनिक रूप से यह कहा गया था कि ट्रंप पुरानी यादों को ताजा करने के लिए बोइंग 747 के पुराने संस्करण से वापस लौटेंगे.
हालांकि, पर्दे के पीछे सुरक्षा एजेंसियों ने ईरान से जुड़े हथियारबंद समूहों से मिले ठोस खतरे को देखते हुए एक 'छल अभियान' (डिसेप्शन ऑपरेशन) की योजना बनाई. ट्रंप को बेहद चुपचाप एक कैटरिंग (खान-पान सेवा) कंटेनर के जरिए एक छोटे सी-32ए सैन्य विमान तक पहुंचाया गया, जिसने उन्हें ब्रिटेन उड़ा दिया.
इस दौरान, एयर फोर्स वन में मौजूद संवाददाताओं और यहां तक कि व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी यही लगता रहा कि राष्ट्रपति उसी मुख्य विमान में यात्रा कर रहे हैं. संदेहास्पद परिस्थितियों के बीच पत्रकारों को प्रेस केबिन की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने की सख्त हिदायत दी गई थी.
ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप किसी तरह सी-32ए से उतरकर वापस पुराने विमान के पास दिखे और फिर वहां से कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए बोइंग 747-8 जेट में सवार होकर वाशिंगटन के लिए रवाना हो गए.
इस संवेदनशील घटनाक्रम पर व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीव चेउंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका विदेशी खतरों से निपटने और राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल करता है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि नया एयर फोर्स वन अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से लैस है. चेउंग के अनुसार, राष्ट्रपति के कई अंतरराष्ट्रीय दुश्मन हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी चेतावनी को सुरक्षा बल अत्यंत गंभीरता से लेते हैं.