TMC के नाम और निशान पर सस्पेंस: चुनाव आयोग पहुंची ममता और ऋतब्रत गुट की जंग
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनाव चिह्न "फूल और घास" को लेकर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. पार्टी पर वर्चस्व को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के गुट आमने-सामने आ चुके हैं.
शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाली चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी दलीलें सुनीं. आयोग किसी भी राजनीतिक दल के विभाजन की स्थिति में उसके नाम, निशान और संपत्तियों के स्वामित्व पर अंतिम फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था है.
इस बैठक के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आयोग दोनों गुटों के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी कर सकता है, जिससे दोनों ही धड़ों को उपचुनाव में आधिकारिक प्रतीक चिन्ह के बिना उतरना पड़ सकता है.
दोनों ही गुट पार्टी के संगठन, चुनाव चिन्ह और 804 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक खातों सहित तमाम संपत्तियों पर अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं. ममता बनर्जी के वफादार और सेरामपुर के सांसद कल्याण बनर्जी ने बताया कि आयोग जल्द ही अंतरिम फैसला सुना सकता है.
ममता गुट का तर्क है कि 2022 में हुए आंतरिक चुनावों के अनुसार पार्टी अध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल का होता है, इसलिए ममता बनर्जी ही कानूनी रूप से टीएमसी की प्रमुख हैं.
वहीं दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का दावा है कि पार्टी के संविधान के तहत राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल तीन साल का होता है जो फरवरी 2025 में ही समाप्त हो चुका है.
हालिया विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के 80 में से 60 से अधिक विधायकों का समर्थन होने का दावा करते हुए बागी गुट ने बहुमत का हवाला दिया है. उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर पास आते देख चुनाव आयोग से जल्द फैसला लेने की मांग की गई है.