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यूपी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या की पहचान के लिये सर्वे

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06 दिस. 2025, 08:50 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

आगरा रेलवे स्टेशन
आगरा रेलवे स्टेशन

लखनऊ । डेस्क: उत्तर प्रदेश में पुलिस ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान करने और उन्हें डिटेंशन सेंटरों में रखने के लिए "डोर-टू-डोर" सर्वे शुरू कर दिया है. झाँसी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक आकाश कुलहरि ने पुष्टि की है कि राज्य सरकार ने 22 नवंबर को ही सर्वे करने और डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का आदेश जारी किया था.


दो साल पहले राज्य सरकार के इशारे पर किए गए एक खुफिया-आधारित अनुमान में 10 लाख अवैध अप्रवासी गिने गए थे, जिनमें से लखनऊ और आगरा में 6,000 थे.

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IG कुलहरि ने बताया कि आदेश के तहत, ललितपुर, झाँसी और जालौन जिलों के अवैध प्रवासियों को वापस भेजे जाने तक रखने के लिए झाँसी में एक डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा.


आगरा के पुलिस उपायुक्त सैयद अली अब्बास ने दावा किया कि शहर के नगर निगम में ही 3,000 ऐसे लोग कार्यरत हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कई निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों ने भी आगरा में ऐसे लोगों को काम पर रखा है.


लखनऊ की मेयर सुषमा खड़कवाल ने दावा किया कि उन्होंने खोज अभियान शुरू किया, जिसके बाद नगर निगम के 160 सफाई कर्मचारी भाग गए. उन्होंने आशंका जताई कि ये लोग रोहिंग्या हो सकते हैं, जिन्होंने जाली दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय पहचान पत्र हासिल किए थे. मेयर ने यह भी कहा कि भागने वाले स्टाफ में से अधिकतर अपराधी थे.


पुलिस और खुफिया यूनिट की टीमें घर-घर जाकर इन लोगों की पहचान कर रही हैं और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जाँच की जाएगी. अधिकारियों ने दावा किया है कि इस "डोर-टू-डोर" सर्वे से बेहतर परिणाम मिलेंगे.


आलोचकों ने इस कार्रवाई को अल्पसंख्यक विरोधी कदम बताया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस अभियान को भाजपा की "एक समुदाय के प्रति नफरत" का प्रतिबिंब बताया.


गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को मार्च अगले साल तक यह कार्रवाई पूरी होने की उम्मीद है. डिटेंशन सेंटरों के लिए खाली और अप्रयुक्त सरकारी इमारतों, सामुदायिक केंद्रों और पुलिस स्टेशनों को परिवर्तित किया जाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP