सरगुजा के संजय वन-वाटिका के पास जू अथॉरिटी की मान्यता नहीं
अंबिकापुर । संवाददाता: सरगुजा स्थित संजय वन-वाटिका (संजय पार्क) में हाल ही में आवारा कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की दर्दनाक मौत ने वन्यजीवों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि जिस स्थान पर इन बेजुबानों को 'रेस्क्यू सेंटर' के नाम पर रखा गया था, उस संजय वन-वाटिका को सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से आधिकारिक मान्यता प्राप्त ही नहीं थी.
बिना किसी वैधानिक अनुमति और मानकों के अभाव में यहां लंबे समय से हिरण, नीलगाय और मोर जैसे वन्यजीवों को रखा जा रहा था.
इस लापरवाही के उजागर होने के बाद अब वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्क से शेष बचे वन्यजीवों को हटाने का निर्णय लिया है.
वर्तमान में यहाँ 16 हिरण, 2 नीलगाय और कुछ मोर बचे हैं. विभाग की योजना के अनुसार, इन सभी जीवों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा.
पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने वाले जानवरों को प्राकृतिक आवास यानी नेशनल पार्क के जंगलों में वापस छोड़ दिया जाएगा, जबकि बीमार या घायल जीवों को उपचार के लिए मान्यता प्राप्त रेस्क्यू सेंटरों में भेजा जाएगा.
घटना की गंभीरता को देखते हुए पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण कुमार पांडेय ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी जिम्मेदारी सीसीएफ दिलराज प्रभाकर और वेंकटाचलम को सौंपी गई है.
शासन स्तर पर सुरक्षा में चूक के लिए डिप्टी रेंजर समेत पांच कर्मचारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है.
गौरतलब है कि संजय वन-वाटिका स्थानीय लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र था, जिससे प्रतिमाह करीब दो लाख रुपये का राजस्व मिलता था, लेकिन मान्यता के अभाव और सुरक्षा की कमी ने मासूम वन्यजीवों की जान जोखिम में डाल दी. अब विभाग भविष्य के लिए नए सिरे से रेस्क्यू सेंटर की मान्यता हेतु आवेदन करने और पार्क की फेंसिंग को मजबूत करने की कवायद में जुटा है.