SC का फैसला: 'फ्रूट ड्रिंक' है रूह अफ़ज़ा, यूपी में अब लगेगा सिर्फ 4% टैक्स
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हमदर्द लेबोरेटरीज के मशहूर शरबत 'रुह अफ़ज़ा' को 'फ्रूट ड्रिंक' की श्रेणी में रखने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस उत्पाद पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वसूला जा रहा 12.5 प्रतिशत वैट गलत था और इसे केवल 4 प्रतिशत टैक्स की श्रेणी में रखा जाना चाहिए.
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केवल फल का अर्क होने से कोई उत्पाद फ्रूट ड्रिंक नहीं बन जाता.
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग ऐसा कोई भी बाजार सर्वेक्षण या सबूत पेश करने में विफल रहा जो यह साबित करे कि व्यापारिक जगत में इसे फ्रूट ड्रिंक नहीं माना जाता है.
पीठ ने इस बात पर भी गौर किया कि दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी इस उत्पाद पर 4 से 5 प्रतिशत की रियायती दर से ही टैक्स वसूला जाता रहा है.
अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और टैक्स ट्रिब्यूनल के पुराने आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि केवल 'शरबत' नाम होने के आधार पर इसे फ्रूट ड्रिंक की श्रेणी से बाहर नहीं किया जा सकता. इस फैसले से हमदर्द लेबोरेटरीज को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अधिक टैक्स के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही थी.
गौरतलब है कि रूह अफ़ज़ा एक विश्व प्रसिद्ध यूनानी शरबत है जिसे 1906 में हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने पुरानी दिल्ली में पेश किया था.
इसका निर्माण मुख्य रूप से गुलाब, केवड़ा, ताजे फलों के अर्क, सब्जियों और जड़ी-बूटियों के मिश्रण से किया जाता है, जो इसे विशेष ठंडक पहुंचाने वाले गुणों से भरपूर बनाता है.
'रूह अफ़ज़ा' नाम का अर्थ 'आत्मा को ताज़गी देने वाला' होता है और यह विशेष रूप से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों में गर्मियों के दौरान और रमज़ान के महीने में इफ्तार के समय बेहद लोकप्रिय है.
इसे पानी या दूध के साथ मिलाकर पीने के अलावा कुल्फी, फालूदा और अन्य मिठाइयों में स्वाद और खुशबू के लिए इस्तेमाल किया जाता है. बँटवारे के बाद हमदर्द लेबोरेटरीज का विस्तार भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश में भी हुआ, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित ब्रांड बन गया.