SC: नागरिकता सिर्फ CAA आवेदन से नहीं, हर दावे की होगी कड़ी जांच
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में साफ कर दिया कि केवल नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन करने भर से किसी को भारत की नागरिकता नहीं मिल जाएगी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि नागरिकता देने का फैसला प्रत्येक आवेदक के दावे और उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के सटीक सत्यापन के बाद ही किया जाएगा.
'द वायर' की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह टिप्पणी स्वयंसेवी संगठन 'आत्मदीप' द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आई. याचिका में कहा गया था कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भागकर आए अल्पसंख्यक लंबे समय से पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं. नागरिकता प्रमाण पत्र न मिलने और चल रहे मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) से नाम कटने के डर के कारण ये लोग 'राज्यविहीन' होने की आशंका में जी रहे हैं.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "आप दावा कर रहे हैं कि नागरिकता कानून की संशोधित नीतियों के आधार पर आपको नागरिकता पाने का अधिकार मिल गया है. लेकिन सिर्फ नागरिकता देने की मांग करने से नागरिकता नहीं मिल जाती. नागरिकता का दावा करते समय, प्रत्येक व्यक्ति को यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत देने होंगे कि वे किस देश के धार्मिक अल्पसंख्यक हैं, उनका धर्म क्या है, वे उस देश में कब तक रहे और किन परिस्थितियों में उन्हें देश छोड़कर आना पड़ा. प्रशासन को इन सभी का सत्यापन करना होगा."
पीठ ने कहा कि CAA ने धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों के लिए कुछ कार्यात्मक अधिकार तो बनाए हैं, लेकिन उन अधिकारों को लागू करने से पहले हर मामले की अलग से जाँच करनी होगी. प्रशासन की यह ज़िम्मेदारी है कि वह आवेदक के बयान और दस्तावेजों की जाँच करके सुनिश्चित करे कि वह व्यक्ति वास्तव में कानून के अनुसार नागरिकता पाने के योग्य है या नहीं.
'आत्मदीप' की याचिका में यह भी दावा किया गया कि कई आवेदकों को अब तक नागरिकता का कोई प्रमाण पत्र नहीं मिला है, और आवेदन स्वीकार करने वाली रसीद को भी वर्तमान SIR में दस्तावेज़ के रूप में नहीं माना जा रहा है. इससे मतदाता सूची तैयार करते समय हजारों लोगों के नाम कटने की आशंका है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र सरकार को इस पूरे मामले से अवगत कराने का निर्देश दिया और कहा कि नागरिकता से जुड़े हर आवेदन का शीघ्र और सही तरीके से निपटारा करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की यह नवीनतम टिप्पणी, जो 'द हिंदू' की रिपोर्ट के हवाले से आई है, ने CAA के क्रियान्वयन और अल्पसंख्यक आवेदकों के भविष्य को लेकर जारी विवाद को एक नई दिशा दी है, जिससे शीर्ष अदालत का रुख साफ हो गया है.