श्रीलंका अपनी 'गुटनिरपेक्ष' नीति पर अडिग रहेगा- राष्ट्रपति
नई दिल्ली । डेस्क: श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने शुक्रवार को संसद को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि देश अपनी संप्रभुता और 'गुटनिरपेक्ष' विदेश नीति से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा. उन्होंने खुलासा किया कि मार्च की शुरुआत में दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने श्रीलंका के मत्तला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति मांगी थी, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया.
राष्ट्रपति ने कहा कि जिबूती स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से आने वाले ये विमान आठ एंटी-शिप मिसाइलों से लैस थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भारी दबाव और मध्य पूर्व में जारी युद्ध की चुनौतियों के बावजूद, श्रीलंका किसी भी महाशक्ति के सैन्य अभियान का हिस्सा बनने के बजाय पूरी तरह तटस्थ रहने के अपने फैसले पर कायम है.
यह कड़ा रुख अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के साथ हुई उनकी उच्चस्तरीय बैठक के तुरंत बाद सामने आया है, जिसमें समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई थी.
यह घटनाक्रम 4 मार्च को गाले तट के पास ईरानी युद्धपोत 'इरिस देना' पर अमेरिकी हमले के बाद उपजे क्षेत्रीय तनाव के बीच देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति ने बताया कि दूसरे ईरानी जहाज 'इरिस बुशहर' को भी सुरक्षा कारणों से कोलंबो के बजाय त्रिंकोमाली बंदरगाह की ओर मोड़ा गया था, और फिलहाल 204 ईरानी नाविकों को नौसैनिक सुविधा में मानवीय आधार पर रखा गया है. राष्ट्रपति दिसानायके के इस बयान ने साफ कर दिया है कि श्रीलंका हिंद महासागर में खुद को किसी सैन्य गुटबाजी का केंद्र नहीं बनने देगा.