शेख हसीना को मृत्युदंड की सजा
शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मृत्युदंड
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को छात्र-नेतृत्व वाली विद्रोह के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है. 78 वर्षीय हसीना, जो देश से बाहर हैं, की अनुपस्थिति में यह सजा दी गई है. अदालत ने उन्हें "मास्टरमाइंड और मुख्य वास्तुकार" करार दिया, जिनकी सरकार ने कथित तौर पर पिछले साल की जन-आंदोलनों को दबाने के लिए 1,400 से अधिक लोगों की हत्या कराई थी.
ट्रिब्यूनल ने फैसले में कहा कि छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए हमले "सिविलियन आबादी के खिलाफ निर्देशित, व्यापक और व्यवस्थित" थे. अदालत के अनुसार, "प्रदर्शनकारियों की हत्या और गंभीर चोट पहुंचाने की घटनाओं में आरोपी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने उकसावे का आदेश देकर और रोकथाम व दंडात्मक उपाय न अपनाकर मानवता के खिलाफ अपराध किया." इसके अलावा, "ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के इस्तेमाल के आदेश देकर भी उन्होंने मानवता के खिलाफ अपराध किया."
हसीना की 15 वर्षों की सत्ता 2024 में छात्र-आंदोलन के बाद समाप्त हो गई थी, जिसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आई. सरकार के एक प्रवक्ता ने ट्रायल को राजनीतिक प्रेरित बताने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "अदालत ने पारदर्शी तरीके से काम किया, पर्यवेक्षकों को अनुमति दी और नियमित दस्तावेज प्रकाशित किए."
हसीना ने अदालत की वैधता को अस्वीकार कर दिया था और सभी आरोपों को खारिज किया था. अक्टूबर में एएफपी न्यूज एजेंसी को दिए एक लिखित साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि दोषी फैसला "पूर्वनिर्धारित" है और वे इससे "आश्चर्यचकित नहीं होंगी." बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस महीने भारत के राजदूत को तलब किया और नई दिल्ली से मांग की कि वे "कुख्यात फरार" हसीना को पत्रकारों से बात करने से रोकें और उन्हें "घृणा फैलाने का मंच" न दें.
हसीना के बेटे साजीब वाजेद, जो उनकी सरकार में सलाहकार थे, ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इसकी उम्मीद थी. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मां को मृत्युदंड मिलेगा, लेकिन वे भारत में सुरक्षित हैं और भारतीय सुरक्षा बल उन्हें संरक्षण देंगे."
हसीना पांच बार प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और उनके पास काफी समर्थन आधार है. उनकी पार्टी अवामी लीग बांग्लादेश की दो प्रमुख पार्टियों में से एक है. फैसले के खिलाफ वे विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश करेंगे, जिससे देश में अस्थिरता बढ़ सकती है. खासकर जब बांग्लादेश अगले साल चुनावों की तैयारी कर रहा है. अवामी लीग को चुनावों से वंचित रखा गया है, इसलिए यह अनिश्चित समय है और आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं है.
यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां हसीना की विरासत और वर्तमान सरकार के बीच तनाव चरम पर है. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पर हैं कि भारत सहित पड़ोसी देश कैसे प्रतिक्रिया देंगे.