शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बिना पावन स्नान किए वाराणसी रवाना
प्रयागराज । डेस्क: संगम पर पिछले 11 दिनों से जारी गतिरोध बुधवार सुबह उस वक्त समाप्त हो गया जब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करने और माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का निर्णय लिया. भारी मन और सरकार के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए शंकराचार्य बिना पावन स्नान किए ही वाराणसी के लिए रवाना हो गए.
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशासन ने उन्हें पालकी में ससम्मान संगम ले जाने का वादा किया था, लेकिन उनके आत्मसम्मान को जो चोट पहुँची है, उसके बाद वह अत्यंत दुखी हैं. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब हृदय में पीड़ा और क्रोध हो, तो पवित्र जल भी शांति नहीं दे सकता.
यह पूरा विवाद 18 जनवरी को तब शुरू हुआ था जब पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी को स्नान के लिए जाने से रोका था, जिसके दौरान साधुओं के साथ कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की हुई थी.
इस घटना के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 11 दिनों से शिविर के बाहर धरने पर बैठे थे. इस प्रकरण ने तब और भी राजनीतिक तूल पकड़ लिया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परोक्ष रूप से उन पर टिप्पणी की, जिसके जवाब में शंकराचार्य ने भी कड़े शब्दों का प्रयोग किया.
इस विवाद का असर प्रशासन पर भी दिखा, जहाँ शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दे दिया, वहीं मुख्यमंत्री के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी सेल्स टैक्स कमिश्नर ने अपना पद त्याग दिया.
संत समाज में भी इस मुद्दे पर दो फाड़ नजर आए, हालांकि अन्य पीठों के शंकराचार्यों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है. फिलहाल शंकराचार्य वाराणसी जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि न्याय की यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है.