काठमांडू घाटी में भयंकर बर्ड फ्लू , 6 लाख मुर्गियां मारी गईं
काठमांडू । डेस्क: नेपाल की राजधानी काठमांडू घाटी इस समय बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) के अब तक के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रही है. घाटी के तीनों प्रमुख जिलों काठमांडू, भक्तपुर और ललितपुर में वायरस का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है, जिसके बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सा तकनीशियनों की चार रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की हैं.
पशु सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. मुकुल उपाध्याय के अनुसार, घाटी में अब तक बर्ड फ्लू के 50 से अधिक पुख्ता मामले सामने आ चुके हैं और संक्रमण वर्तमान में अपने चरम पर है.
मार्च महीने में पूर्वी नेपाल से शुरू हुआ यह प्रकोप अब देश के कम से कम 10 जिलों में फैल चुका है, जिससे पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े छोटे और गरीब किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब तक पूरे देश में सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए 6 लाख से अधिक मुर्गियों को मारा जा चुका है और लाखों की संख्या में अंडे और भारी मात्रा में पोल्ट्री दाना नष्ट किया गया है.
इस बार विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि बर्ड फ्लू का खतरनाक वायरस ए (H5N1) काठमांडू के प्रसिद्ध सेंट्रल जू तक पहुंच गया है. चिड़ियाघर में गिद्ध, उल्लू, हंस और क्रेन सहित दर्जनों दुर्लभ पक्षियों की मौत हो चुकी है. संक्रमण केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है, बल्कि चिड़ियाघर के कुछ जंगली जानवरों, जैसे कि सिवेट (कस्तूरी बिलाव) में भी इसके लक्षण पाए गए हैं.
इस अभूतपूर्व संकट को देखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार से चिड़ियाघर को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है. चिड़ियाघर के प्रवक्ता गणेश कोइराला ने बताया कि स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, लेकिन चिड़ियाघर को दोबारा कब खोला जाएगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है. अधिकारियों को अंदेशा है कि कौवों या अन्य जंगली पक्षियों के माध्यम से वायरस चिड़ियाघर के भीतर फैला है.
इस बीच, पशु सेवा विभाग ने चिड़ियाघर प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और जैव-सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चिड़ियाघर प्रशासन ने शुरुआत में बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत की बात को छिपाने का प्रयास किया और जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब जाकर मामले को सार्वजनिक किया.
सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है. हालांकि, नियमों के मुताबिक संक्रमित क्षेत्रों के पक्षियों को मार दिया जाता है, लेकिन चिड़ियाघर के बचे हुए दुर्लभ जंगली जानवरों और पक्षियों को मारा नहीं जाएगा.
नेपाल में बर्ड फ्लू का इतिहास काफी पुराना है, जहां साल 2009 में पहली बार इसका मामला मिला था. तब से लगभग हर साल किसानों को इस तबाही का सामना करना पड़ता है. इस बार कोशी प्रांत में वायरस के सबटाइप ए (H9N2) ने पोल्ट्री उद्योग को तबाह किया, तो वहीं काठमांडू घाटी में ए (H5N1) कहर बरपा रहा है.
इस बार चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि संक्रमण उन घरों में फैला है जो घनी आबादी के बीच छोटी संख्या में मुर्गियां पालते हैं, जहां 42 दिनों का पूर्ण प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.
इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नुकसान से बचने के लिए कई किसान संक्रमित मुर्गियों को बाजार में बेच सकते हैं, जिससे इंसानों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. नेपाल में साल 2019 में बर्ड फ्लू से एक 21 वर्षीय युवक की मौत हो चुकी है, ऐसे में प्रशासन के सामने इस संक्रमण को इंसानों में फैलने से रोकने की बड़ी चुनौती है.