ड्रोन हमलों से पस्त रूसी रिफाइनरियाँ, भारत बना पेट्रोल का नया सहारा
नई दिल्ली । डेस्क: यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के कारण रूस के घरेलू ईंधन उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते देश में गंभीर तेल संकट पैदा हो गया है. इस संकट से निपटने के लिए रूस ने विदेशी ईंधन आयात पर निर्भरता बढ़ा दी है, जिसमें भारत एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरकर सामने आया है.
ऊर्जा विश्लेषक फर्म वोर्टेक्स के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में रूस का समुद्री मार्ग से गैसोलीन (पेट्रोल) आयात रिकॉर्ड 1,25,000 बैरल प्रति दिन (लगभग 4,70,000 टन) तक पहुँच गया. व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारतीय रिफाइनरियों ने रूस को लगभग 10 लाख बैरल पेट्रोल की आपूर्ति की है.
यह आपूर्ति मुख्य रूप से गुजरात के वाडिनार स्थित उस रिफाइनरी से हुई है, जिसका संचालन नयरा एनर्जी करती है और जिसमें रूस की रोसनेफ्ट की आधी हिस्सेदारी है. दिलचस्प बात यह है कि रूस को भेजा जाने वाला यह ईंधन संभवतः उसी रूसी कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसे भारत पिछले कुछ समय से रियायती दरों पर आयात कर रहा है.
ड्रोन हमलों के कारण रूस के घरेलू उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है. जुलाई और अगस्त के दौरान रूसी रिफाइनरियों पर 32 से अधिक हमले हुए, जिससे बुनियादी ढाँचे को गहरा नुकसान पहुँचा है. स्थिति को सँभालने के लिए मॉस्को ने घरेलू स्तर पर ईंधन बिक्री पर कई प्रतिबंध लागू किए हैं और गैसोलीन निर्यात पर जनवरी 2027 तक पूर्ण प्रतिबंध बढ़ा दिया है.
भारत के अलावा तुर्की और मोरक्को भी रूस को पेट्रोल की आपूर्ति कर रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार, भारत से भेजी गई पेट्रोल की खेप प्रतिबंधित जहाजों और भूमध्य सागर में 'डार्क' शिप-टू-शिप (STS) ट्रांसफर के ज़रिए रूस पहुँची, जहाँ जहाजों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को बंद कर दिया था.
विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्पादन क्षमता बहाल होने तक रूस को निकट भविष्य में भी इसी तरह ईंधन आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा.