राजस्थान: धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत दो पादरियों पर FIR
जयपुर । डेस्क: राजस्थान पुलिस ने राज्य के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहला मामला दर्ज किया है. यह कार्रवाई कोटा में 'प्रलोभन' के माध्यम से कथित धार्मिक धर्मांतरण कराने के आरोप में दो ईसाई पादरियों चांडी वर्गीस (नई दिल्ली) और अरुण जॉन (कोटा) के खिलाफ की गई है.
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारियों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई. 4 से 6 नवंबर तक कोटा के बीयरशेबा चर्च में आयोजित 'आध्यात्मिक सत्संग' के दौरान धर्मांतरण को बढ़ावा देने और कई लोगों को बपतिस्मा देने का आरोप लगाया गया है.
पादरियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2025 की धारा 3 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है. FIR में हिंदू समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने और राज्य सरकार को "शैतान का साम्राज्य" बताने का भी ज़िक्र है.
पुलिस ने कार्यक्रम के वीडियो और सोशल मीडिया लाइवस्ट्रीम क्लिप प्राप्त किए हैं और जांच शुरू कर दी है. पादरी अरुण जॉन ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि कार्यक्रम में कोई अवैध गतिविधि नहीं हुई थी और पुलिस ने उन्हें और पादरी वर्गीस को तीन दिन के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा है.
यह कानून, जो जबरन धर्मांतरण के लिए आजीवन कारावास और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने जैसे कठोर दंड का प्रावधान करता है, 29 अक्टूबर को अधिसूचित किया गया था. पैतृक धर्म में लौटने वालों को इस कानून से छूट दी गई है.
गौरतलब है कि पहले ही जयपुर कैथोलिक वेलफेयर सोसाइटी ने इस अधिनियम की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है.