रायपुर पुलिस रेंज-संबलपुर रेंज नक्सल मुक्त हुआ: विजय शर्मा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति 'पूना मारगेम' (पुनर्वास से पुनर्जीवन) को रविवार एक बड़ी सफलता मिली है. ओडिशा सीमा से सटे महासमुंद जिले में बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद (BBM) डिवीजन के 15 सक्रिय माओवादियों ने अपने अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. इस घटनाक्रम के साथ ही अब रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा की संबलपुर रेंज पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो गई है.
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस पुनर्वास का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समर्पण के साथ ही ओडिशा राज्य कमेटी का पश्चिमी सब-जोन (BBM डिवीजन) अब अस्तित्व में नहीं रहा. विजय शर्मा ने कहा, "इस क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने से अब लोग भयमुक्त जीवन जी सकेंगे और शांति का नया अध्याय शुरू होगा."
आत्मसमर्पण करने वाले इस दल में सबसे बड़ा नाम विकास उर्फ सुदर्शन का है, जो ओडिशा राज्य कमेटी का सदस्य और BBM डिवीजन का प्रभारी था. 1985 से संगठन में सक्रिय विकास पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था. कुल 15 माओवादियों (9 महिलाएं और 6 पुरुष) पर सामूहिक रूप से 73 लाख रुपये का इनाम दर्ज था.
ये माओवादी अपने साथ भारी मात्रा में हथियार भी लाए हैं, जिनमें 3 एके-47 राइफल, 2 एसएलआर (SLR), 2 इंसास (INSAS), 4 .303 राइफल, 3 बारह बोर बंदूकें शामिल हैं.
इस समर्पण की पटकथा तब लिखी गई जब BBM डिवीजन ने पत्र लिखकर सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया था. इसके जवाब में विजय शर्मा ने आकाशवाणी के माध्यम से एक ऑडियो संदेश जारी कर उन्हें सुरक्षा और सम्मान का आश्वासन देते हुए 3 मार्च तक पुनर्वास की अपील की थी. इसी अपील के असर से रविवार इन माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सफाया तय समय सीमा में हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि भटके हुए युवाओं का विश्वास अब सुशासन और विकास पर बढ़ रहा है. सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों का विस्तार कर रही है ताकि 'विकसित छत्तीसगढ़' का स्वरूप आकार ले सके.