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दो साल में रेबीज से मौतों में भारी वृद्धि: केंद्र सरकार

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06 अग. 2025, 02:57 AM 2 मिनट में पढ़ें 3

कुत्ते
कुत्ते

नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि पिछले दो वर्षों में रेबीज से होने वाली मौतों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है. 2022 में जहां रेबीज से 22 लोगों की मृत्यु हुई थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 180 हो गया. 


हालांकि, इस दौरान संभावित रेबीज मामलों की संख्या 2022 में 4,885 से घटकर 2024 में 1,079 हो गई. 

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2024 में सबसे अधिक मौतें तमिलनाडु (43), कर्नाटक (42) और आंध्र प्रदेश (39) से दर्ज की गईं. 2023 में रेबीज से 121 लोगों की मृत्यु हुई थी और 2,223 संभावित मामले सामने आए थे.


पशुपालन मंत्रालय के राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने केरल के सांसद आदूर प्रकाश के एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं की है. 


उन्होंने कहा, "नगरपालिकाएं पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम लागू कर रही हैं ताकि आवारा कुत्तों की संख्या स्थिर की जा सके." केंद्र द्वारा जारी पशु जन्म नियंत्रण नियमों में न्यूट्रींग और रेबीज रोधी टीकाकरण को प्राथमिक उपाय बताया गया है.


मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) ने एबीसी कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई सलाह जारी की हैं. 


हाल ही में 21 जुलाई, 2025 को आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और पशुपालन विभाग के सचिवों ने सभी मुख्य सचिवों को एक संयुक्त सलाह जारी कर एबीसी कार्यक्रम को लागू करने और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास का आग्रह किया.


मंत्री ने यह भी बताया कि पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी (एसपीसीए) और स्थानीय निकायों को एबीसी कार्यक्रम के लिये प्रति कुत्ते 800 रुपये और प्रति बिल्ली 600 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है.


इसके अलावा, राज्य संचालित पशु चिकित्सा अस्पतालों को सर्जिकल थिएटर, केनेल और रिकवरी यूनिट जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान भी प्रदान किया जाता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP