पुतिन और पेज़ेशकियान पहुंचे नई दिल्ली
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम के बढ़ते दबदबे और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की राजधानी नई दिल्ली एक ऐतिहासिक कूटनीतिक जमावड़े की गवाह बनने जा रही है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को 11-सदस्यीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पालम वायु सेना स्टेशन पहुंचे, जहां केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया. दो दिवसीय इस सम्मेलन में मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव, ईरान-इजराइल संघर्ष और यूक्रेन युद्ध जैसे गंभीर मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने वाले हैं.
द्विपक्षीय बैठकों और कूटनीतिक संबंधों का दौर
इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताओं पर टिका हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियान के साथ अलग-अलग उच्चस्तरीय वार्ताएं करेंगे. इसके साथ ही, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर सकते हैं.
ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान की यह पहली भारत यात्रा है. आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी ईरानी राष्ट्रपति का यह दौरा मध्य पूर्व संकट को सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में प्रमुखता से खड़ा करता है.
ब्रिक्स विस्तार के बाद पहली बड़ी परीक्षा और आंतरिक चुनौतियां
साल 2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा गठित यह समूह हाल के वर्षों में व्यापक रूप से विस्तारित हुआ है. इसमें ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे नए सदस्य शामिल हुए हैं. हालांकि, खाड़ी देशों के बीच अमेरिकी और इजराइली नीतियों को लेकर अलग-अलग रुख होने के कारण विश्लेषक इसे समूह की एकजुटता के लिए एक बड़ी परीक्षा मान रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रिक्स का यह विस्तार, जो कभी इसकी ताकत के रूप में देखा जा रहा था, वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बीच इस मंच के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.
भारत और चीन के रिश्तों में बर्फ पिघलने के संकेत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की साल 2019 के बाद यह पहली भारत यात्रा है. छह वर्ष पूर्व हिमालयी सीमा पर हुई सैन्य झड़प के बाद दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव के बाद इसे बेहद अहम कदम माना जा रहा है. हाल के दिनों में सीधी उड़ानों, वीजा प्रक्रियाओं और उच्चस्तरीय संपर्कों की बहाली से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखा गया है, हालांकि सीमा विवाद और बढ़ते व्यापार घाटे के कारण अविश्वास की परतें अब भी मौजूद हैं.
वैश्विक संतुलन साधने में जुटा भारत
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में एक संतुलित और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख अपनाया है. जहां एक तरफ नई दिल्ली ने रूसी ईंधन के जरिए अपने ऊर्जा हितों की रक्षा की है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिबद्धता दोहराई है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया कीव यात्रा और यूक्रेनी नेतृत्व के साथ बातचीत भारत की इसी संतुलित विदेश नीति का उदाहरण है.
सम्मेलन को देखते हुए पूरी दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. लुटियंस दिल्ली और मध्य दिल्ली के प्रमुख रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है तथा यातायात पर कई पाबंदियां लागू की गई हैं.