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यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पत्रकार पर पुलिस की एफआईआर

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14 अक्टू. 2026, 06:46 PM 3 मिनट में पढ़ें 12

विवेक भगत
विवेक भगत

नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग थाने में एक स्वतंत्र महिला पत्रकार और उनके दो सहयोगियों के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने, सरकारी काम में बाधा डालने तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है. यह मामला दिल्ली पुलिस के कनाट प्लेस सब-डिवीजन में तैनात सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है. 


एसीपी भगत ने आरोप लगाया है कि 3 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग के खिलाफ बूटा सिंह गोलचक्कर पर आयोजित एक प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान उक्त पत्रकार और उनके साथियों ने उनके नेमप्लेट को देखकर जातिसूचक बातें कीं और उनके पद पर होने को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं.


प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221 (सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकना), धारा 356(2) (मानहानि) और धारा 3(5) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(p), 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत आरोप लगाए गए हैं. 


इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार के अलावा 'न्यूज़ डिग्गी' के गजेंद्र सिंह और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है. इसके साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्य अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका, सौरभ दास और रत्ना सिंह को सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री और वीडियो प्रसारित करने के मामले में नामजद किया गया है.


शिकायत के अनुसार, 3 अक्टूबर की दोपहर को जब पुलिस बल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनसीसी) की धारा 163 लागू होने के कारण प्रदर्शनकारियों को हटने का निर्देश दे रहा था, तभी आरोपी पत्रकार ने अधिकारी की जाति को लेकर जातिवादी बातें कीं. शिकायत में कहा गया कि अधिकारी ने शुरुआत में इन बातों को अनदेखा कर अपना कर्तव्य निभाया. 


हालांकि, दोपहर लगभग 3 बजे जब पुलिस हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बस से ले जाने के लिए मार्ग साफ करा रही थी, तब पत्रकार और उनके सहयोगियों ने एसीपी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया और उनके साथ अभद्रता करते हुए सरकारी कार्य में गंभीर बाधा डाली.


अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया है कि उसी शाम लगभग 6:15 बजे आरोपियों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ व्यक्तिगत नारेबाजी करते हुए उन्हें "यौन शिकारी" और "संभावित बलात्कारी" जैसी अपमानजनक उपाधियां दीं. 


इसके उपरांत सोशल मीडिया पर भी उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से भ्रामक पोस्ट शेयर किए गए, जिससे उन्हें मानसिक आघात पहुंचा है. दूसरी ओर, पत्रकार द्वारा एसीपी के खिलाफ दायर की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है और वह मामला क्राइम ब्रांच की जांच के अधीन है. मामले की जांच जारी है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP