नक्सली जनअदालत हत्याकांड में पीलूराम आंचला को आजीवन कारावास
कांकेर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में वर्ष 2019 में हुई एक ग्रामीण की निर्मम हत्या के मामले में भानुप्रतापपुर स्थित एनआईए कोर्ट ने इस जघन्य वारदात में शामिल नक्सली पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. विशेष सत्र न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मजबूत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास का दंड दिया.
यह मामला मई 2023 का है, जब सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली थी. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान आरोपी पीलूराम को उसके दो अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था.
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों ने उनके कब्जे से माओवादी साहित्य, वॉकी-टॉकी सेट, कुछ पत्र और नकद राशि बरामद की थी. पुलिस ने घटना के बाद से ही आरोपी और उसके साथियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर लगातार तलाश जारी रखी थी.
यह खौफनाक वारदात 26 अगस्त 2019 को नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव जुगडा में घटी थी. हथियारों से लैस नक्सलियों का एक दस्ता गांव में दाखिल हुआ और ग्रामीण श्यामनाथ आंचला को उसके घर से जबरन अगवा कर पास के जंगलों में ले गया.
वहां नक्सलियों ने अपनी तथाकथित 'जन अदालत' लगाई और श्यामनाथ पर पुलिस मुखबिरी का झूठा आरोप लगाते हुए गोली मारकर उसकी हत्या कर दी.
वारदात को अंजाम देने के बाद नक्सलियों ने मौके पर एक पर्चा भी छोड़ा था, जिसमें मृतक और उसके पिता पर पुलिस के लिए जासूसी करने का दावा किया गया था. अदालत के इस सख्त फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और हिंसा का रास्ता चुनने वालों को देर-सवेर उनके अंजाम तक पहुंचना ही पड़ता है.