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जीवनसाथी द्वारा शारीरिक संबंधों से लगातार इनकार करना 'क्रूरता'- SC

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06 जून 2026, 09:19 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी जीवनसाथी द्वारा वैवाहिक संबंधों (दाम्पत्य सुख) और शारीरिक संबंधों से लगातार इनकार करना 'क्रूरता' के दायरे में आता है. अदालत के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यह तलाक का एक वैध आधार है. 


इस टिप्पणी के साथ ही शीर्ष अदालत ने पिछले 15 वर्षों से अलग रह रहे एक डॉक्टर दंपत्ति के विवाह को भंग करने के आदेश दिए हैं.

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यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पत्नी की उस याचिका को खारिज करते हुए सुनाया, जिसमें उसने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए तलाक के फैसले को चुनौती दी थी. 


मामले के अनुसार, पति राजस्थान में कार्यरत था जबकि पत्नी गुजरात में तैनात थी. पति का आरोप था कि उसकी पत्नी ने पिछले 15 वर्षों से स्वेच्छा से गुजरात में रहकर उसे दाम्पत्य सुख से वंचित रखा और इस दौरान दोनों ने बमुश्किल कुछ महीने ही साथ बिताए.


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि साथ रहने की संक्षिप्त अवधि में भी पत्नी रात को जल्दी कमरा अंदर से बंद कर लेती थी और खटखटाने पर भी दरवाजा नहीं खोलती थी, जिसके कारण पति को दूसरे कमरे में सोना पड़ता था. 


पत्नी ने अलग कमरों में सोने की बात से इनकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन के बुनियादी पहलुओं से लगातार पीछे हटना मानसिक क्रूरता के समान है, इसलिए राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा क्रूरता के आधार पर दी गई तलाक की डिक्री पूरी तरह सही है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP