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पाकिस्तान बेचेगा घाटे में डूबी PIA

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05 दिस. 2025, 08:20 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

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इस्लामाबाद । डेस्क: कर्ज के बोझ तले दबी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को बेचने की प्रक्रिया फिर से तेज हो गई है. पाकिस्तानी सरकार 23 दिसंबर को नई बोली आमंत्रित करने जा रही है, जिसमें अब पूरा एयरलाइंस बेचने का प्रस्ताव है. 


प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार ने लीज पर लिए गए विमानों पर बिक्री कर माफ कर दिया है और कानूनी व कर दावों से सीमित सुरक्षा की पेशकश की है. इसके अलावा, PIA के करीब 80 फीसदी कर्ज को पहले ही स्थानांतरित कर दिया गया है.


पिछले वर्ष शरीफ सरकार ने PIA के 60 फीसदी शेयर बेचने की कोशिश की थी, लेकिन एकमात्र बोलीदाता ने मात्र 10 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 3.6 करोड़ डॉलर) की पेशकश की, जो सरकार की 85 अरब रुपये की न्यूनतम मांग से बहुत कम थी. 


अब सरकार पूर्ण बिक्री पर जोर दे रही है, ताकि IMF के 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज की शर्तें पूरी हों.


प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निजीकरण से जुड़े कॉर्पोरेट समूहों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. एक प्रेस विज्ञप्ति में उनकी उद्धृत करते हुए कहा गया, "PIA की नीलामी 23 दिसंबर को होगी, जो सभी मीडिया पर लाइव प्रसारित की जाएगी. हम इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और योग्यता सुनिश्चित कर रहे हैं." PTV न्यूज ने X पर साझा इस बयान से साफ है कि सरकार इस बार सफलता के प्रति आश्वस्त है.


रिपोर्ट्स के मुताबिक, निजीकरण में भाग लेने के लिए चार पाकिस्तानी संस्थाओं को मंजूरी मिल चुकी है. इनमें फौजी फर्टिलाइजर (फौजी फाउंडेशन के अधीन), हबीब रफीक, यूनुस ब्रदर्स और एयरब्लू शामिल हैं, जो बहुमत शेयरों के लिए बोली लगाने को उत्सुक हैं. 


फौजी फाउंडेशन पाकिस्तान की सेना से जुड़ी प्रमुख व्यावसायिक समूह है, जहां सेना प्रमुख आसिम मुनीर का अप्रत्यक्ष प्रभाव माना जाता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया कि मुनीर फाउंडेशन के सेंट्रल मैनेजमेंट कमिटी में क्वार्टरमास्टर जनरल के जरिए नियुक्ति करते हैं.


PIA की वित्तीय मुश्किलें अतिरिक्त कर्मचारियों और कमजोर प्रबंधन से उपजी हैं, जिससे सालाना अरबों का नुकसान हो रहा है. सरकार के लिए वर्षांत तक बोली प्रक्रिया खत्म करना जरूरी है, क्योंकि IMF का कार्यकारी बोर्ड 8 दिसंबर को 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त पर फैसला लेगा. 


यदि PIA का निजीकरण सफल रहा, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन सैन्य प्रभाव वाली बोलीदाताओं की मौजूदगी विवादों को जन्म दे सकती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP