कश्मीर में टेरर फंडिंग के लिए पाकिस्तान भेज रहा नशे की खेप
श्रीनगर । डेस्क: कश्मीर घाटी में बढ़ती नशीली दवाओं की लत के पीछे पड़ोसी देश पाकिस्तान की एक बड़ी और गहरी साजिश सामने आ रही है. कश्मीर में ड्रग्स की तस्करी का उपयोग सीधे तौर पर आतंकवाद के वित्त पोषण (टेरर फंडिंग) के लिए किया जा रहा है.
कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने शनिवार को घाटी में ड्रग्स के बढ़ते जाल पर गहरी चिंता जताते हुए स्वीकार किया कि पिछले तीन वर्षों में नशा करने वालों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है.
प्रशासन के अनुसार, यह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं है, बल्कि 'नार्को-टेररिज्म' का एक हिस्सा है, जिसके तहत पाकिस्तान से तस्करी कर लाई जा रही हेरोइन के जरिए युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है और उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में हो रहा है.
सरकारी आंकड़ों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि जम्मू-कश्मीर की लगभग 10 प्रतिशत आबादी नशीले पदार्थों के सेवन की चपेट में है, जिसमें 5 लाख लोग खतरनाक ओपियोड के आदी हो चुके हैं.
केंद्र सरकार ने संसद में भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान प्रायोजित इस नार्को-सिंडिकेट को तोड़ने के लिए सुरक्षा बल मुस्तैद हैं और 2018 से 2022 के बीच NDPS अधिनियम के तहत करीब 10,000 गिरफ्तारियां की गई हैं.
प्रशासन अब इस साजिश को नाकाम करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ धार्मिक गुरुओं और उलेमाओं की मदद ले रहा है, ताकि सीमा पार से संचालित इस नार्को-आतंकवाद की कमर तोड़ी जा सके और कश्मीर के युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकाला जा सके.
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