पाक में 47 फीसदी गरीब
WB Report: पाक में 47 फीसदी गरीब
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान की करीब आधी जनसंख्या गरीबी की रेखा के नीचे वास करती है. विश्व बैंक की 2025 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की 44.7 फीसदी आबादी प्रतिदिन 4.20 अमरीकी डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है.
यह आंकड़ा पाकिस्तान में बढ़ती आर्थिक बदहाली और नीतिगत विफलताओं को उजागर करता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि अत्यंत गरीबी, यानी प्रतिदिन 3.00 डॉलर से कम आय की स्थिति, 4.9 फीसदी से बढ़कर 16.5 फीसदी हो गई है. इसका मतलब है कि लाखों पाकिस्तानी और गहरे संकट में फंस गये हैं.
इसके अलावा, मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) के अनुसार, 30 फीसदी से अधिक आबादी स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के मामले में गंभीर अभाव का सामना कर रही है.
पड़ोसियों से तुलना में पिछड़ा पाकिस्तान
जबकि पड़ोसी देश जैसे चीन, बांग्लादेश और नेपाल ने गरीबी उन्मूलन में उल्लेखनीय प्रगति की है, पाकिस्तान इस दिशा में काफी पीछे है. चीन ने अपनी अत्यंत गरीबी दर को 1 फीसदी से नीचे ला दिया है, वहीं बांग्लादेश ने माइक्रोफाइनेंस और गारमेंट उद्योग के दम पर लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है. नेपाल भी 2.2 फीसदी गरीबी दर के साथ बेहतर स्थिति में है.
सामाजिक योजनाओं की नाकामी
पाकिस्तान में बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम (BISP) जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं में भारी-भरकम फंडिंग के बावजूद कोई ठोस बदलाव नहीं आया है. ये योजनाएं अल्पकालिक राहत तो देती हैं, लेकिन गरीबी के चक्र को तोड़ने में असफल साबित हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन योजनाओं में प्रभावी "पॉवर्टी ग्रेजुएशन" मॉडल का अभाव है, जिसके कारण लोग सरकारी सहायता पर निर्भर बने रहते हैं.
पाकिस्तान पॉवर्टी एलिविएशन फंड (PPAF) ने कुछ हद तक महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने और ब्याज-मुक्त ऋण देने में सफलता हासिल की है. . विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यापक और अद्यतन गरीबी डेटाबेस के बिना लक्षित नीतियां बनाना असंभव है.
सुधार की जरूरत
विश्व बैंक की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पाकिस्तान को डेटा-आधारित नीतियां अपनानी होंगी, जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित हों. इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना, सामुदायिक स्तर पर गरीबी उन्मूलन मॉडल को बढ़ावा देना और संस्थागत सुधारों को लागू करना जरूरी है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गये, तो पाकिस्तान दक्षिण एशिया में गरीबी का गढ़ बनकर रह जायेगा.