ऑपरेशन कागर: आदिवासियों पर एक और हमला- सोनी सोरी
बेंगलुरु । डेस्क: छत्तीसगढ़ के बस्तर की आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी ने छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार द्वारा माओवादियों को समाप्त करने के लिए शुरू किए गए 'ऑपरेशन कागर' को आदिवासियों पर एक और हमला करार दिया है. उन्होंने इसे पहले के 'ऑपरेशन ग्रीनहंट' और 'साल्वा जुदुम' जैसे अभियानों की कड़ी में बताया.
बस्तर की इस कार्यकर्ता ने कहा, "बस्तर हो या अन्य आदिवासी क्षेत्र, आदिवासियों को कानूनी और सामाजिक-आर्थिक समर्थन की कमी रही है. उन्हें जेल में डाला गया या सामूहिक रूप से राज्य की हिंसा का सामना करना पड़ा."
शनिवार को कर्नाटक पीपुल्स फोरम अगेंस्ट वॉर ऑन आदिवासियों द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक चर्चा में, जिसमें 'ऑपरेशन कागर और कॉरपोरेटाइजेशन, सैन्यीकरण और शांति प्रक्रियाओं' पर विचार-विमर्श हुआ, सोनी सोरी ने कहा कि आदिवासियों पर हमला कोई अलग-थलग घटना नहीं है.
उन्होंने कहा, "इसका मूल मकसद राज्य और कॉरपोरेट ताकतों द्वारा भूमि हड़पना है, जिसके कारण आदिवासी अपने घरों से भागने को मजबूर हैं. हम धन के लिए नहीं, बल्कि बुनियादी मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. माओवादियों के खिलाफ युद्ध वास्तव में हम निर्दोष आदिवासियों पर युद्ध है."
कोऑर्डिनेशन कमेटी फॉर पीस के प्रो. जी. हरगोपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अनियंत्रित राज्य हिंसा माओवादियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को निशाना बना रही है.
उन्होंने कहा, "जब राज्य कानून की सीमाओं से बाहर काम करता है, तो राज्य और निजी हिंसा में कोई अंतर नहीं रह जाता."
पीपुल्स डेमोक्रेटिक फोरम के प्रो. नागरगरे रमेश ने सीपीआई (माओवादी) समूहों के साथ बिना शर्त युद्धविराम और शांति वार्ता की वकालत की, साथ ही सभी गैर-न्यायिक हत्याओं की स्वतंत्र जांच की मांग की.