फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट मामले में कार्यवाही करें- NHRC
भोपाल । डेस्क: मध्य प्रदेश के दमोह में मिशन अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में काम कर रहे एक फर्जी डॉक्टर के मामले की जांच में NHRC को कई अनियमिततायें मिलीं हैं. NHRC ने राज्य सरकार और केंद्र को कई कार्रवाइयों की अनुशंसा करते हुए चार सप्ताह के भीतर अनुपालन करने को कहा है.
अनुशंसाओं में 7 पीड़ित रोगियों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की सहायता राशि देने, डॉक्टर और अस्पताल के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अलावा दोषी पुलिसकर्मियों और सीएमएचओ, दमोह के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है.
गौरतलब है कि दमोह के मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट नरेन्द्र विक्रमादित्य दमोह में 7 मरीजों का ऑपरेशन किय था. बता दें कि यही फर्जी डॉक्टर बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भी पदस्थ. जहां पर उसने छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल का भी ऑपरेशन किया था. ऑपरेशन के बाद राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल की मौत हो गई थी.
NHRC ने अपनी अनुशंसाओं में 7 पीड़ित रोगियों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की सहायता राशि देने, डॉक्टर और अस्पताल के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अलावा दोषी पुलिसकर्मियों और सीएमएचओ, दमोह के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है.
इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव से देशभर में कैथ लैब का सत्यापन कराने और आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन की जांच के लिये सभी राज्य सरकारों को निर्देश देने को कहा गया है.
NHRC ने अपनी जांच के बाद मध्य प्रदेश के दमोह में मिशन अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के तौर पर काम कर रहे एक फर्जी डॉक्टर के मामले में कई अनियमितताएं पाई हैं. इसके अनुसार, आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र को कई अनुशंसाएं की हैं और चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने 28 मार्च, 2025 को एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था और मामले पर संबंधित राज्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने के अलावा अपनी जांच भी की थी.
आयोग ने अपने मुख्य सचिव के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार को अनुशंसा की है कि वह इस अस्पताल में फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा इलाज के बाद मरने वाले सभी सात मरीजों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि दे. आयोग ने मामले के अंतिम निपटारे तक मिशन अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की भी सिफारिश की है.
इसके साथ ही मध्य प्रदेश में कार्यरत सभी कैथ लैब का निरीक्षण करने के लिये अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किये हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार यह सत्यापित करने के लिए भी आवश्यक निर्देश जारी करेगी कि सभी डॉक्टर कैथ लैब में काम करने के लिए योग्य हैं या नहीं.
पुलिस महानिदेशक, मध्य प्रदेश को एफआईआर दर्ज करने और इसकी जांच में लापरवाही बरतने वाले संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने, मिशन अस्पताल के आरोपियों और प्रबंधन के खिलाफ प्रक्रियात्मक कानून और कानूनी सिद्धांतों के अनुसार अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने और गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी, ठगी, जालसाजी, चिकित्सकीय लापरवाही, कदाचार, धन की हेराफेरी आदि से संबंधित आरोप लगाने के लिए कहा गया है.