नेपाल में 'बालेन' युग का आगाज, बालेंद्र शाह बनेंगे देश के अगले PM
काठमांडू । डेस्क: नेपाल की राजनीति में एक युगांतरकारी परिवर्तन की लहर देखी जा रही है. पिछले साल सितंबर में हुए ऐतिहासिक युवा विद्रोह, जिसमें 77 लोगों की जान गई थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था, उसके बाद हुए पहले आम चुनाव के परिणामों ने पूरे देश को चौंका दिया है. 35 वर्षीय मशहूर रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह, जिन्हें दुनिया 'बालेन' के नाम से जानती है, अब नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं.
शुक्रवार को निर्वाचन आयोग द्वारा जारी शुरुआती रुझानों के अनुसार, बालेन शाह की 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (आरएसपी) लगभग 100 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो इसके मुख्य प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे है. दूसरे स्थान पर चल रही नेपाली कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि आरएसपी अब सरकार बनाने की प्रबल दावेदार है.
बालेन शाह का उदय किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. एक सिविल इंजीनियर और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री धारक शाह ने संगीत की दुनिया से अपने करियर की शुरुआत की थी. उनके रैप गीत, विशेष रूप से 2019 में आया 'बलिदान', नेपाल के सत्ताधारी वर्ग और भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करते रहे हैं, जिसने उन्हें देश के करोड़ों युवाओं का चहेता बना दिया.
2022 में काठमांडू के मेयर के रूप में उनकी जीत ने पारंपरिक राजनीति की नींव हिला दी थी. मेयर रहते हुए उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित की, हालांकि उन्हें रेहड़ी-पटरी वालों और भूमिहीन लोगों के प्रति सख्त रवैये के लिए मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का भी सामना करना पड़ा.
जनवरी में मेयर पद से इस्तीफा देकर चुनावी मैदान में उतरे बालेन ने पारंपरिक मीडिया से दूरी बनाए रखी और सीधे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने 3.5 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स से संवाद किया.
उनकी पार्टी आरएसपी ने अपने महत्वाकांक्षी घोषणापत्र में पांच साल के भीतर नेपाल की प्रति व्यक्ति आय को $1,447 से बढ़ाकर $3,000 करने, 1.2 मिलियन नए रोजगार सृजित करने और देश की जीडीपी को $100 बिलियन तक पहुँचाने का वादा किया है.
विश्लेषकों का कहना है कि बालेन की जीत नेपाल की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के अंत का संकेत है, जो दशकों से कुछ चुनिंदा दलों के इर्द-गिर्द सिमटी हुई थी.
हालांकि, प्रधानमंत्री के रूप में उनकी राह आसान नहीं होगी. उन्हें एक भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र को सुधारने के लिए विशेषज्ञों की एक मजबूत टीम और व्यापक राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी. यदि वे सफल होते हैं, तो यह न केवल नेपाल के भीतर बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति में युवाओं की शक्ति का एक नया उदाहरण पेश करेगा.