नेहा बोरा: 'नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भी न थमने दें आंदोलन'
नई दिल्ली । डेस्क: चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने एक बड़ा बयान दिया है. शुक्रवार को उन्होंने देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि प्रदर्शन से पहले इसके शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार भी कर लिया जाता है, तब भी आंदोलन को किसी भी कीमत पर रुकने न दें.
नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि प्रशासन बड़े पैमाने पर आयोजकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर रहा है और पुलिस जगह-जगह प्रदर्शन के समन्वयकों की तलाश कर रही है.
स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रोका जा रहा है, कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है तथा भारी संख्या में सेना, पैरामिलिट्री बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है. उन्होंने वर्तमान हालात की तुलना देश में अघोषित आपातकाल से की.
स्वतंत्रता संग्राम के दिनों को याद करते हुए आइसा नेता ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि 8 अगस्त 1942 को जब ब्रिटिश सरकार ने बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया था, तब भी जनता ने आंदोलन की मशाल को बुझने नहीं दिया था.
आज भी इतिहास खुद को दोहरा रहा है और जिस तरह सरकार अंग्रेजों का रवैया अपना रही है, देश की जनता भी स्वतंत्रता संग्राम की तर्ज पर इस आंदोलन का नेतृत्व खुद संभालेगी.
सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने दिल्ली आ रहे लोगों से आह्वान किया कि यदि उन्हें रास्ते में ही रोका जाता है चाहे वह रेलवे स्टेशन हो या मेट्रो स्टेशन वे वहीं बैठकर 'SIR वापस लो' और 'ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो' के नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराएं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सीधी लड़ाई जनता और सत्तारूढ़ दल के बीच है, जिसमें अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है. शनिवार को होने वाले इस प्रदर्शन में विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों के भी शामिल होने की संभावना है.