नेशनल हेराल्ड एकमात्र मामला है जिसमें ED ने निजी शिकायत पर कार्रवाई की
नई दिल्ली । डेस्क: नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना रुख स्पष्ट करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने अदालत के समक्ष दाखिल अपने जवाब में आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ ईडी की यह पूरी कार्यवाही किसी निष्पक्ष कानून के तहत नहीं, बल्कि बाह्य और राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर चलाई जा रही है. उन्होंने अदालत को बताया कि पूरे देश में यह एकमात्र ऐसा मामला है, जहां ईडी ने किसी पुलिस एफआईआर के बजाय केवल एक निजी शिकायत को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी है.
निजी शिकायत और प्रक्रियागत खामियों पर सवाल
कांग्रेस नेताओं की ओर से दायर जवाब में इस बात को रेखांकित किया गया है कि ईडी ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दर्ज कराई गई एक निजी शिकायत के आधार पर एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है. जवाब के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कानून किसी निजी शिकायत पर ईडी को जांच शुरू करने की अनुमति नहीं देता. गांधी परिवार ने दलील दी कि ईडी हमेशा से यह मानती रही है कि जब तक किसी अनुसूचित या मूल अपराध में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न की जाए, तब तक मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू नहीं हो सकती. ऐसे में इस मामले में एजेंसी का रुख उसके अपने स्थापित कानूनी रुख के विपरीत दिखाई देता है.
सात साल की देरी और एजेंसी का बदलता रुख
जवाब में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने यह शिकायत वर्ष 2014 में दर्ज कराई थी, लेकिन ईडी ने सात साल तक खामोश रहने के बाद 30 जून 2021 को जाकर एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज की. लंबे समय तक जांच शुरू न होना इस बात का प्रमाण है कि खुद एजेंसी भी यह मानती थी कि निजी शिकायत पर कार्यवाही नहीं हो सकती. याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय के समक्ष ईडी की यह चुप्पी और एक चुनिंदा मामले में अपना ही नियम बदलना, इस केस के पीछे के बाहरी कारणों और उद्देश्यों को साफ तौर पर उजागर करता है.
ट्रायल कोर्ट का फैसला और ईडी की जल्दबाजी
गौरतलब है कि ईडी ने इस मामले में अप्रैल 2025 में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सैम पित्रोदा सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रॉसेक्यूशन शिकायत दर्ज की थी. हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इस पर संज्ञान लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया था. निचली अदालत का मानना था कि यह मामला चूंकि मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज एक निजी शिकायत पर आधारित है और इसमें कोई एफआईआर मौजूद नहीं है, इसलिए यह सुनवाई योग्य नहीं है. इसके तुरंत बाद अगले ही दिन ईडी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी, जिसे गांधी परिवार ने एजेंसी की असाधारण जल्दबाजी और विशेष दिलचस्पी का सबूत बताया है.
कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताकर याचिका खारिज करने की मांग
सोनिया गांधी और राहुल गांधी की ओर से अदालत में दलील दी गई है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध था और उसमें किसी भी क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि की गुंजाइश नहीं थी. उन्होंने ईडी द्वारा दी गई चुनौती को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार देते हुए इसे खारिज करने की मांग की है. न्यायमूर्ति सचिन दत्ता के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई, जिसे अब आगामी 12 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दिया गया है.