रवि, 18 अक्टू. 2026

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मेघालय: अवैध कोयला खदान में भीषण विस्फोट, 18 मजदूरों की मौत

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05 फ़र. 2026, 03:09 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

कोयला खदान
कोयला खदान

शिलांग । डेस्क: मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में गुरुवार को एक अवैध कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 18 श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है. यह हादसा थंगस्कू इलाके में हुआ, जिसके बाद पुलिस ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल से बचाव अभियान के लिए मदद मांगी है. 


पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार ने बताया कि अब तक 16 शव बरामद किए जा चुके हैं और राहत कार्य जारी है.

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प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह विस्फोट अवैध खनन गतिविधियों के दौरान हुआ. 


गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2014 में ही मेघालय में असुरक्षित 'रैट-होल' माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा. 


इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन की खबरें सामने आती रही हैं. पुलिस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके. 


गौरतलब है कि रैट-होल माइनिंग (Rat-hole Mining) कोयला निकालने की एक ऐसी विधि है जो मुख्य रूप से मेघालय के पहाड़ी इलाकों में प्रचलित रही है. इसका नाम 'चूहे के बिल' (Rat-hole) के समान होने के कारण पड़ा है.


यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

इस तकनीक में ज़मीन के अंदर बहुत ही संकीर्ण क्षैतिज सुरंगें खोदी जाती हैं. ये सुरंगें आमतौर पर केवल 3 से 4 फीट ऊंची होती हैं, जिसमें एक वयस्क व्यक्ति बमुश्किल रेंगकर अंदर जा पाता है.


रैट-होल माइनिंग के मुख्य प्रकार:

साइड-कटिंग (Side-cutting): इसमें पहाड़ी की ढलान पर सीधे संकीर्ण छेद किए जाते हैं जब तक कि कोयले की परत न मिल जाए.


बॉक्स-कटिंग (Box-cutting): इसमें पहले एक बड़ा आयताकार गड्ढा (करीब 100 वर्ग मीटर) खोदा जाता है और फिर उसकी गहराई से चूहे के बिल जैसी सुरंगें निकाली जाती हैं.


यह खतरनाक और विवादित क्यों है?

सुरक्षा का अभाव: इन सुरंगों में ऑक्सीजन की कमी होती है और ये कभी भी धंस सकती हैं.


पानी भरने का खतरा: मानसून के दौरान या पास की नदी का पानी इन सुरंगों में अचानक भर जाने से मजदूरों के निकलने का रास्ता बंद हो जाता है. 


पर्यावरण को नुकसान: इस प्रक्रिया से निकलने वाला कचरा नदियों को प्रदूषित करता है, जिससे पानी अम्लीय हो जाता है.


कानूनी प्रतिबंध: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2014 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि यह न तो वैज्ञानिक है और न ही सुरक्षित.


हालिया स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को बरकरार रखा है और केवल उन्हीं खनन गतिविधियों की अनुमति दी है जो वैज्ञानिक मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन करती हैं. बावजूद इसके, दुर्गम इलाकों में अवैध रूप से यह काम अब भी जारी रहता है. Symbolic Photo

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP