जेल में बंद माओवादियों का भी आत्मसमर्पण कराया जायेगा
दंतेवाड़ा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए अब जेलों में बंद माओवादियों को भी मुख्यधारा में लाने की योजना बनाई है. प्रदेश के गृहमंत्री ने दंतेवाड़ा स्थित लाइवलीहुड कॉलेज का दौरा कर स्पष्ट किया कि जो नक्सली जेलों में निरुद्ध हैं और पुनर्वास की इच्छा रखते हैं, उनका भी आत्मसमर्पण कराया जाएगा.
उन्होंने कॉलेज प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए हैं कि जेल में बंद ऐसे नक्सलियों की तत्काल सूची तैयार की जाए जो हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं.
इस रणनीति को प्रभावी बनाने के लिए गृहमंत्री ने एक नवाचार का ऐलान किया है, जिसके तहत आत्मसमर्पित माओवादियों का एक जत्था जेल जाकर वहां बंद अपने साथी नक्सलियों से मुलाकात करेगा. यह जत्था जेल में परिरुद्ध नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के लाभ समझाएगा और उन्हें हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेगा.
गृहमंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा कि जिसने भी हथियार डाल दिए हैं, वह "भारत माता का बेटा" है और सरकार उसके मान-सम्मान व रोजगार की पूरी जिम्मेदारी उठाएगी.
लाइवलीहुड कॉलेज में आत्मसमर्पित युवाओं से संवाद के दौरान गृहमंत्री ने एक-एक कर उनका हाल जाना और प्रशिक्षण व स्वरोजगार की समीक्षा की.
उन्होंने जिला प्रशासन, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि पुनर्वास की प्रक्रिया को इतना सरल और पारदर्शी बनाया जाए कि भटक चुके अन्य युवा भी बिना किसी भय के आत्मसमर्पण कर सकें. सरकार की इस पहल का उद्देश्य बस्तर में हिंसा को पूरी तरह समाप्त कर जेल में बंद युवाओं को भी सम्मानजनक जीवन देना है.