शराबबंदी का भक्तों पर असर, पर काल भैरव बेअसर
छत्तीसगढ़, शराबबंदी से उज्जैन के काल भैरव मंदिर पर असर नहीं, चढ़ती रहेगी
उज्जैन | संवाददाताः महाकाल की नगरी उज्जैन में सरकारी फरमान के चलते एक सवाल भक्तों के जेहन में कुलबुला रहा था कि शराबबंदी को जनता तो झेल जायेगी, लेकिन सदियों से जिस भगवान को मदिरा का भोग लग रहा हो. उनकी अवहेलना कैसे की जा सकती है.
प्रशासन ने इसका समाधान निकाल लिया है. श्री काल भैरव को पहले की ही तरह मदिरा का भोग लगता रहेगा इसके लिए नियमित रूप से सुचारू व्यवस्था चलती रहेगी. भक्तों को जरूर शराब के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी.
अभी तक मंदिर के सामने ही शराब काउंटर होने के चलते भक्तों को सुविधा रहती थी कि वहीं के वहीं शराब क्रय किये और श्रद्धा भक्ति से ओत प्रोत होते हुए काल भैरव को समर्पित किया.
जो बचा वह प्रसाद के रूप में जितना हो सका बांटा व खुद भी स्वेच्छानुसार गृहण किया और चलते बना.
अब नये कानून के चलते मंदिर के सामने की शराब दुकान बंद होने से भक्तों को शहर के बाहर से खरीदना पड़ेगा.
दरअसल मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मध्यप्रदेश के 17 धार्मिक शहरों में शराबबंदी का ऐलान किया है. यह बंदी सिर्फ शहर के नगरी निकाय क्षेत्र में लागू होगी.
नगर निगम या नगर पालिका की सीमा के बाहर शराब बिक्री पर कोई रोक नहीं है. यह नियम 1 अप्रैल यानि मूर्ख दिवस से लागू होगा.
चूंकि इन धार्मिक शहरों में उज्जैन भी सम्मिलित है और यहां के प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में शराब (मदिरा) का भोग लगाने की प्रचीन परंपरा है.
मध्यप्रदेश सरकार के इस अभियान से भक्तों को काल भैरव की पूजा- अर्चना के लिए अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है.
कलेक्टर के अनुरोध को सरकार ने नहीं सुना
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए उज्जैन कलेक्टर ने काल भैरव के मदिरा भोग की पूजन-परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि मंदिर के सामने वाली एक दुकान संचालित होने दिया जाये.
जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना न करना पड़े. लेकिन सरकार ने कलेक्टर के अनुरोध को अनसुना करते हुए मंदिर के सामने वाली दोनों दुकानों को बंद करवा दिया है.
मंदिर को नियमित मदिरा मिलेगी
शराबबंदी पर कलेक्टर नीरज कुमार सिंह का कहना है कि शहर की नगर निगम में आने वाली 17 शराब दुकान और 11 बियर बार बंद होंगे. अब शराब नगर निगम सीमा के बाहर ही मिल सकेगी.
इसी के साथ काल भैरव भगवान को चढ़ने के लिए दो काउंटर लगे थे, उन्हें बंद कर दिया गया है.
फिलहाल मंदिर में भगवान को चढ़ाने के लिए नियमित रूप से जो मदिरा दी जाती थी, वह मिलेगी.
काल भैरव मंदिर के पुजारी ओम प्रकाश चतुर्वेदी का कहना है कि "रोज पांच बार शराब का भोग कालभैरव को चढ़ाया जाता है. प्रशासन द्वारा इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है.
इन शहरों में शराबबंदी
मध्य प्रदेश के जिन शहरों में शराबबंदी की घोषणा हुई है उनमें उज्जैन के अलावा ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, मंदसौर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, अमरकंटक, सलकनपुर, पन्ना, मंडला, मुलताई, बरमान कला, लिंगा, कुंडलपुर है.
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के 17 धार्मिक नगरों को पूर्णतः पवित्र घोषित किया गया है. इस सीमा में समस्त मदिरा दुकानों एवं बार को आज से बंद किया जाएगा.
इस नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत (खुद के पीने के लिए) नियमानुसार आधिपत्य सीमा में मदिरा रख सकते हैं.
आधिपत्य सीमा से अधिक मदिरा पाए जाने पर नियमानुसार आबकारी अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी.
भांग पर प्रतिबंध नहीं है
भक्तों का यहां तक कहना है कि जो चीज भगवान को चढ़ती हो वह कैसे किसी धार्मिक नगरी के लिये अपवित्र हो सकती है.
यह धार्मिक श्रद्धा से जुड़ा हुआ मामला भी है. एक सवाल यह भी है कि जब शहर के भीतर मंदिर में शराब चढ़ेगा ही तो फिर बंदी का कितना असर होगा.
दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि महाकाल की नगरी में मदिरा पर प्रतिबंध लग रहा है पर भांग निर्बाध तरीके से भक्तों के लिए उपलब्ध रहेगी.
प्राचीन परंपरा का निर्वहन
आपको बता दें कि प्रसिद्ध भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर क्षिप्रा नदी के किनारे भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित है.
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन में जिन रत्नों की प्राप्त हुई थी उनमें एक रत्न वारुणी अर्थात मदिरा भी थी. इसी मदिरा को धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में चढ़ाया जाता है.
प्राचीन पूजन परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी काल भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है. यहां रोज श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.
शराब का चढ़ावा अच्छाई पर चलने का प्रतीक
इस मंदिर से जुड़ी अनेक किवदंतियां भी प्रचलित हैं. जिनके अनुसार उज्जैन के राजा भगवान महाकाल ने ही काल भैरव को इस स्थान पर शहर की रक्षा के लिए नियुक्त किया है.
इसलिए काल भैरव को शहर का कोतवाल भी कहा जाता है. कहते हैं कि काल भैरव को शराब अर्पित करते समय हमारा भाव यही होना चाहिए कि हम हमारी समस्त बुराइयां भगवान को समर्पित करें और अच्छाई के मार्ग पर चलने का संकल्प करें.
शराब से परिवार हो रहे बर्बाद
सीएम मोहन यादव का कहना है कि हम 17 धार्मिक शहरों में शराबबंदी करने की घोषणा कर रहे हैं. शराब से परिवार के परिवार बर्बाद हो जाते हैं.
सामाजिक बुराइयां भी आती हैं. इसलिए देशी हो या विदेशी हो, धार्मिक शहरों में शराब की दुकानों में ताले लगाए जा रहे हैं.
शराब से राजस्व बढ़ाने पर जोर
दूसरी तरफ सरकार शराब से राजस्व बढ़ाने में लगी हुई है. जानकारी के मुताबिक धार्मिक नगरी उज्जैन में कई शराब दुकानों के बंद होने के कारण, इस राजस्व की भरपाई उन दुकानों से की जाएगी जो चालू हैं.
पिछले वर्ष आबकारी विभाग को 13,896 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. इस बार 20% वृद्धि के साथ राजस्व का लक्ष्य 16,613 करोड़ रुपये रखा गया है.
विभाग के अनुसार नीलामी प्रक्रिया 1 अप्रैल के बाद भी जारी रह सकती है. अभी शेष बची दुकानों से 1,147 करोड़ रुपये की वसूली बाकी है.
गांवों में धड़ल्ले से मिल रही शराब
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मध्यप्रदेश के गांवों में अवैध शराब बिक्री के मामले बढ़ रहे हैं. अवैध शराब कई गांवों में नेताओं के आश्रय में ठेकेदार व पुलिस के गठजोड़ से धड़ल्ले से बेची जाती है.
धार्मिक नगरों की नगरीय सीमा क्षेत्रों में शराबबंदी को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि इससे नगर में शांति व पवित्रता कायम होगी.
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि प्रदेश में बार-बार भाजपा की फायर ब्रांड वरिष्ठ नेता उमा भारती के लगातार शराब विरोध को लेकर दबाव में ऐसा किया गया है.