सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

कर्नाटक: फर्जी फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की जांच के आदेश

C

CG Khabar

01 अक्टू. 2026, 06:03 PM 2 मिनट में पढ़ें 5

डीके शिवकुमार
डीके शिवकुमार

बेंगलुरु । डेस्क: कर्नाटक में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाने की कोशिशों को लेकर सियासत गरमा गई है. राज्य के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों के पांच घंटे चले उग्र विरोध-प्रदर्शन के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़े पैमाने पर फर्जी फॉर्म-7 दाखिल किए जाने के आरोपों की जांच के आदेश दे दिए हैं. 


कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबू कुमार ने सभी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को निर्देश दिए हैं कि फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर झूठे दावे या घोषणा करने वाले आवेदकों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए.

विज्ञापन


निर्वाचन आयोग की ओर से निष्पक्ष जांच के आश्वासन और सख्त कदम उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपना धरना समाप्त किया. 


इससे पहले कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान विपक्ष द्वारा स्वचालित और योजनाबद्ध तरीके से "प्री-फिल्ड" फॉर्म-7 भरकर थोक के भाव जमा कराए जा रहे हैं, ताकि विशेष समुदायों के वास्तविक वोट काटे जा सकें. 


कर्नाटक पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत पांच प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की हैं. 


वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने कार्यकर्ताओं का बचाव करते हुए कहा है कि संदिग्ध या फर्जी मतदाताओं को चिह्नित करना कोई अपराध नहीं है. आयोग ने साफ किया है कि झूठे पाए जाने वाले आवेदकों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और नियमानुसार जांच के बाद ही अंतिम कार्रवाई की जाएगी.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP