कपिल सिब्बल ने बंगाल में भारी संख्या में CAPF की तैनाती को बताया 'अघोषित आपातकाल'
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले राजनीति गरमा गई है. राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र की भाजपा सरकार और भारत निर्वाचन आयोग पर तीखे प्रहार किए. सिब्बल ने बंगाल में सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती को "अघोषित आपातकाल" करार देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य की मशीनरी का घोर दुरुपयोग कर रही है.
उन्होंने कहा कि बंगाल में जिस तरह का माहौल बनाया गया है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच लड़ा जा रहा है.
कपिल सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है. उन्होंने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त का एकमात्र 'पेशा' अब यह सुनिश्चित करना रह गया है कि किसी भी तरह पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत हो."
सिब्बल ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि बंगाल में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2,400 प्लाटून तैनात की गई हैं, जिसका अर्थ है लगभग 2.4 लाख जवान. उनके अनुसार, यह अनुपात इतना अधिक है कि हर 100 नागरिकों पर एक जवान तैनात है, जो कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से भी ज्यादा है.
उन्होंने सवाल किया कि जब मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है, तब केंद्र ने अपनी पूरी ताकत बंगाल में क्यों झोंक दी है?
सिब्बल ने रेलवे पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि गुजरात से करीब 5,000 लोगों को विशेष ट्रेनों के जरिए पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा है, जबकि आम जनता को घर जाने के लिए लाठियां खानी पड़ रही हैं. उन्होंने इसे आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन बताया.
इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें इतिहास और संविधान की समझ नहीं है, वे केवल 'बुलडोजर' की भाषा जानते हैं.
ममता बनर्जी का पक्ष लेते हुए सिब्बल ने कहा कि एक अकेली महिला के खिलाफ देश की पूरी ताकत लगा देना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी को ही विजयी बनाएगी. बंगाल में कल 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान होना है, जो राज्य की सत्ता की दिशा तय करेगा.