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झीरम घाटी हमला: 13वीं बरसी पर रमन सिंह ने दी श्रद्धांजलि

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25 मई 2026, 01:16 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

झीरम घाटी शहीद स्मारक
झीरम घाटी शहीद स्मारक

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह सबसे काला दिन आज भी हर किसी के जहन में ताजा है, जब नक्सलियों ने लोकतंत्र पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया था. साल 2013 में 25 मई के ही दिन झीरम घाटी में हुए खूनी मंजर को आज पूरे 13 वर्ष बीत चुके हैं. इस दर्दनाक बरसी पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष रमन सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. 


उन्होंने कहा कि झीरम घाटी की वह टीस सूबे की माटी कभी भुला नहीं सकती. रमन सिंह ने इस कायरतापूर्ण हमले में जान गंवाने वाले दिग्गज राजनेताओं, जनप्रतिनिधियों और जांबाज जवानों को नमन करते हुए कहा कि आज प्रदेश नक्सलवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई जीत चुका है और बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ना ही इन शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.


<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="hi" dir="ltr">झीरम घाटी नक्सल हमले की पीड़ा को छत्तीसगढ़ की भूमि कभी भूल नहीं सकती। इस कायराना नक्सली हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों एवं वीर जवानों को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनका बलिदान सदैव हमें लोकतंत्र और जनसेवा के प्रति… <a href="https://t.co/0tZOJKqsUX">pic.twitter.com/0tZOJKqsUX</a></p>&mdash; Dr Raman Singh (@drramansingh) <a href="https://twitter.com/drramansingh/status/2058798236987793807?ref_src=twsrc%5Etfw">May 25, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>


गौरतलब है कि यह खूनी दास्तान साल 2013 के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले लिखी गई थी. उस वक्त राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही थी. इसी सिलसिले में कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में 'परिवर्तन यात्रा' निकालने का फैसला किया था, जिसका शंखनाद 25 मई को सुकमा से हुआ था. 


सभा समाप्त होने के बाद शाम को जब करीब 200 कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं का 25 गाड़ियों का काफिला जगदलपुर लौट रहा था, तभी नक्सलियों ने इस खूनी साजिश को अंजाम दिया.


झीरम घाटी के घने जंगलों के बीच नक्सलियों ने पहले से ही पेड़ों को काटकर रास्ता रोक रखा था. जैसे ही काफिला वहां थमा, झाड़ियों में घात लगाकर बैठे 200 से अधिक नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी. करीब डेढ़ घंटे तक चारों तरफ सिर्फ गोलियों की गूंज सुनाई देती रही. 


शुरुआती गोलीबारी में ही तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की जान चली गई. इसके बाद जो मंजर सामने आया, वह रूह कंपा देने वाला था. पहाड़ों से नीचे उतरे नक्सलियों ने एक-एक गाड़ी की तलाशी ली, शवों को दोबारा निशाना बनाया और जिंदा बचे लोगों को बंधक बना लिया.


इस पूरे हमले के केंद्र में 'बस्तर टाइगर' के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा थे, जिन्हें नक्सली 'सलवा जुडूम' आंदोलन की अगुवाई करने की वजह से अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे. कर्मा ने बाकी लोगों की जान बचाने के लिए खुद को नक्सलियों के हवाले कर दिया था, जिसके बाद नक्सलियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उन पर 100 से ज्यादा गोलियां बरसाईं और चाकू से गोदकर उनकी हत्या कर दी. 


इस जघन्य वारदात में विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा समेत कुल 32 से ज्यादा लोग असमय काल के गाल में समा गए. इस हमले ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की एक पूरी पीढ़ी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था, जिसे लेकर तत्कालीन भाजपा सरकार पर सुरक्षा में चूक और राजनीतिक साजिश के गंभीर आरोप भी लगे थे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP