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जापान अब दुनिया को घातक हथियार और लड़ाकू विमान बेचेगा

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21 अप्रै. 2026, 08:48 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

साने ताकाइची-जापान पीएम
साने ताकाइची-जापान पीएम

नई दिल्ली । डेस्क: जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए देश की दशकों पुरानी रक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया है. ताकाइची कैबिनेट ने घातक हथियारों, जिनमें अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और युद्धपोत शामिल हैं, के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को आधिकारिक तौर पर हटा लिया है. 


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जापान के शांतिवादी संविधान और उसकी सैन्य सीमाओं को देखते हुए इसे टोक्यो की विदेश और रक्षा नीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. 

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प्रधानमंत्री ताकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस बदलाव की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण अब सैद्धांतिक रूप से संभव होंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ये हथियार केवल उन्हीं देशों को दिए जाएंगे जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप इनके उपयोग के लिए प्रतिबद्ध होंगे.



इस नीतिगत बदलाव के बाद अब ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया सहित कम से कम 17 देश जापानी हथियारों की खरीद के लिए पात्र हो गए हैं. हाल ही में जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच 7 अरब डॉलर का एक बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसके तहत मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए युद्धपोतों का निर्माण करेगी. 


1967 और 1976 से लागू पिछले नियमों के तहत जापान केवल गैर-घातक सैन्य उपकरण, जैसे कि निगरानी और माइन स्वीपिंग यंत्रों का ही निर्यात कर सकता था. नई नीति में यह भी प्रावधान है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में हथियारों का निर्यात प्रतिबंधित रहेगा, लेकिन 'विशेष परिस्थितियों' और जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसमें छूट दी जा सकती है.


ताकाइची का यह कदम चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है. चीन ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे जापान का "लापरवाह सैन्यीकरण" करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसके प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी है. 


प्रधानमंत्री ताकाइची, जिन्हें अक्सर 'आयरन लेडी' और चीन के प्रति सख्त रुख रखने वाला नेता माना जाता है, के इस फैसले ने क्षेत्रीय भू-राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. 


इसी दौरान, उनके द्वारा विवादित यासुकुनी युद्ध स्मारक पर अनुष्ठानिक भेंट भेजने की खबरों ने भी विवाद खड़ा कर दिया है, जिसे चीन और दक्षिण कोरिया जैसे पड़ोसी देश संवेदनहीन मानते हैं. कुल मिलाकर, जापान का यह नया रुख यह स्पष्ट करता है कि बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच वह अब अपनी सैन्य क्षमता और रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP