छत्तीसगढ़ शराब घोटाले पर बोला सुप्रीम कोर्ट-बिना सबूत के आरोप ईडी का चलन
छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट का ईडी से सवाल
दिल्ली | डेस्कः ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है कि, बिना किसी सबूत के आरोप लगाना एक चलन सा हो गया है.
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले केस में बंद आरोपी अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुये प्रवर्तन निदेशालय की जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किये हैं.
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस.ओका ने कहा कि ईडी बिना सबूत के आरोप लगाती है, यह एक तरीका सा बन गया है.
सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से पेश वकील एसवी राजू ने आरोपी के खिलाफ सबूत पेश करने का समय मांगा था.
इस दौरान जज ने ईडी की जांच पर सवाल खड़े किये और इस मामले में कोर्ट ने ईडी को 2 दिन में सबूत पेश करने का समय दिया.
अनेक मामलों में यही देखा जा रहा- कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज किए गए अनगिनत मामलों में यही देख रहे हैं कि, आप बिना किसी सबूत के सिर्फ आरोप लगाते हैं. यह एक पैटर्न सा हो गया है.
बता दें कि पिछली सरकार के दौरान ईडी ने अपनी जांच में दावा किया था कि प्रदेश के आबकारी विभाग में 2000 करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान सरकार को हुआ है.
वहीं ईडी ने इसमें तत्कालीन आईएएस अनिल टुटेजा , आबकारी विभाग के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अरविंद सिंह समेत नेताओं और मंत्रियों के बीच सिंडिकेट की बात कही थी.
ईडी पर विपक्ष के आरोपों को बल मिला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी लंबे समय से जांच कर रही है. ईडी ने ACB में एफआईआर दर्ज कराई है.
एफआईआर में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. ईडी ने जांच करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय शराब घोटाला हुआ है.
इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की ईडी को लेकर की गई हालिया टिप्पणी जांच को लेकर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर ईडी जब घोटाले का दावा कर रही है, तो न्यायालय को सबूत क्यों नहीं उपलब्ध करा पा रही है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से विपक्ष द्वारा ईडी पर बिना बजह तंग किये जाने के आरोपों को भी बल मिला है.