राजकीय पशु वन भैंसा 'छोटू' को क्या खुले जंगल में छोड़ना सुरक्षित है?
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा के संरक्षण को लेकर वन विभाग का एक नया प्रयोग विवादों के केंद्र में आ गया है. गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगभग ढाई दशक से बाड़े के भीतर कैद 'छोटू' नामक वन भैंसे को खुले जंगल में आजाद करने की तैयारी चल रही है.
विभाग की योजना है कि असम से लाई गई तीन मादा वन भैंसों के साथ छोटू को भी प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाए ताकि इनकी आबादी बढ़ सके.
इसके लिए 'सॉफ्ट रिलीज' प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिसमें पहले इन्हें एक बाड़े में साथ रखा जाएगा और बाद में रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में विचरण के लिए मुक्त कर दिया जाएगा. हालांकि, विभाग की इस रणनीति ने वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है.
विशेषज्ञों का तर्क है कि 25 साल का हो चुका छोटू न केवल लंबे समय से इंसानी देखरेख में रहा है, बल्कि वह दृष्टिहीन भी है. ऐसी स्थिति में घने जंगलों के बीच अपने भोजन की तलाश करना और बाघों जैसे शिकारियों से खुद को सुरक्षित रखना उसके लिए नामुमकिन जैसा हो सकता है.
जानकारों का कहना है कि इतने सालों तक कैद में रहने के बाद किसी भी वन्यजीव का प्राकृतिक स्वभाव बदल जाता है. साथ ही, उम्र के इस पड़ाव पर उसकी प्रजनन क्षमता और छोटे झुंड की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर संशय बना हुआ है.
पर्यावरण प्रेमियों ने इस योजना के समय और पूर्व में हुए असफल प्रयोगों पर सवाल उठाते हुए इसे जोखिम भरा कदम बताया है. दूसरी ओर, वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि राजकीय पशु को बचाने के लिए यह एक आवश्यक पहल है और वर्तमान में सुरक्षा की परिस्थितियां ऐसी कोशिशों के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं. Symbolic Photo