ईरान: क्या कूटनीति की जगह युद्ध लेगा नया मोड़?
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के प्रति कड़े तेवर दिखाते हुए संकेत दिया है कि वे तेहरान को नए परमाणु समझौते के लिए मजबूर करने हेतु सीमित सैन्य हमलों पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञों और कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि बमबारी से ईरान बातचीत की मेज पर आने के बजाय और अधिक आक्रामक हो सकता है, जिससे मध्य पूर्व में एक नया और विनाशकारी संघर्ष शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है.
पेंटागन ने इस बीच क्षेत्र में दो विमान वाहक पोत, लड़ाकू जेट और ईंधन भरने वाले विमानों की बड़े पैमाने पर तैनाती की है, जिससे ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ किसी भी समय सैन्य कार्रवाई शुरू करने का विकल्प मौजूद है. ट्रंप ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में ईरानी लोगों के लिए अपने संदेश के बारे में पूछे जाने पर स्पष्ट कहा कि उन्हें एक उचित समझौते पर बातचीत करनी ही होगी.
भले ही ट्रंप प्रशासन सैन्य दबाव को एक रणनीति के रूप में देख रहा है, लेकिन विश्लेषकों का तर्क है कि वार्ता के बीच में हमला करना पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है. क्षेत्रीय सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यदि अमेरिका हमला करता है, तो तेहरान बातचीत से पूरी तरह पीछे हट सकता है.
वाशिंगटन में स्टिमसन सेंटर की फेलो बारबरा स्लेविन का कहना है कि सैन्य खतरों के कारण ईरान समझौते के लिए कम इच्छुक होगा. गौरतलब है कि इससे पहले जून में इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमला किया था, जिसमें ट्रंप ने दावा किया था कि मुख्य संवर्धन सुविधाएं नष्ट कर दी गई हैं.
अब सवाल यह है कि नए हवाई हमलों से आखिर क्या हासिल होगा. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जो पहले ही गाजा और लेबनान में युद्ध लड़ रहे हैं, लगातार अमेरिका पर ईरान के खिलाफ कठोर सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहे हैं.
ट्रंप की रणनीति में विरोधाभास भी दिखाई दे रहा है. एक तरफ जहां विदेश मंत्री मार्को रुबियो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों के समर्थन पर लगाम लगाने वाले व्यापक समझौते की मांग कर रहे हैं, वहीं ट्रंप अब एक सीमित परमाणु समझौते की ओर झुकते दिख रहे हैं.
यह वही ट्रंप हैं जिन्होंने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ओबामा-युग के परमाणु समझौते को रद्द कर दिया था.
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की बेका वासर का कहना है कि हवाई हमले अक्सर नेताओं को आकर्षित करते हैं क्योंकि वे दूर से किए जा सकते हैं, लेकिन ये अक्सर लंबे और महंगे संघर्षों में बदल जाते हैं.
ईरान वर्तमान में आंतरिक अशांति और पिछले हमलों से कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन वह अभी भी अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों पर जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है.
पूर्व अमेरिकी दूत डेनिस रॉस के अनुसार, दोनों पक्ष युद्ध नहीं चाहते, लेकिन एक-दूसरे को मनोवैज्ञानिक रूप से दबाने की कोशिश कर रहे हैं.
फिलहाल, ट्रंप ने 10 से 15 दिनों की समय सीमा दी है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह केवल दबाव बनाने की रणनीति है या अमेरिका वास्तव में एक नए युद्ध की ओर बढ़ रहा है.