ईरान के खार्ग द्वीप पर अमेरिका की भीषण बमबारी
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक अत्यंत खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर भीषण हमले किए हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस ऑपरेशन को "मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली हवाई हमलों में से एक" करार दिया है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य लक्ष्यों को "पूरी तरह से नेस्तनाबूत" कर दिया है.
ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि हालांकि उन्होंने फिलहाल ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को "मिटाने" का फैसला नहीं किया है, लेकिन यदि ईरान या किसी अन्य देश ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों के स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन में बाधा डालने की कोशिश की, तो वे तत्काल अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करेंगे.
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' के अनुसार, खार्ग द्वीप पर कम से कम 15 बड़े विस्फोटों की आवाज सुनी गई है. सूत्रों का कहना है कि इन हमलों ने मुख्य रूप से ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियों, एक नौसैनिक अड्डे और हवाई अड्डे की सुविधाओं को निशाना बनाया है.
हालांकि, ईरान ने दावा किया है कि तेल उत्पादन से जुड़ी संरचनाओं को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है, लेकिन द्वीप से काले धुएं के गुबार उठते देखे गए हैं.
खार्ग द्वीप ईरान के लिए आर्थिक रूप से जीवन रेखा के समान है, क्योंकि देश के कच्चे तेल का 90 प्रतिशत से अधिक निर्यात यहीं से होता है. इस युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल देखा गया है, जो पहले से ही अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है.
क्षेत्र में तनाव की गंभीरता को देखते हुए, अमेरिका ने अपनी सैन्य मुद्रा को और अधिक मजबूत करना शुरू कर दिया है. अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, 2,500 अतिरिक्त मरीन सैनिकों और 'यूएसएस त्रिपोली' (USS Tripoli) नामक एक उभयचर युद्धपोत को मध्य पूर्व के लिए रवाना कर दिया गया है.
हालांकि अधिकारी इसे एक सुरक्षात्मक कदम बता रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह लंबी लड़ाई और संभावित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी का संकेत हो सकता है. दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए धमकी दी है कि यदि उसके तेल केंद्रों पर हमला किया गया, तो वह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से संबंधित सभी तेल सुविधाओं को "राख के ढेर" में बदल देगा.
तेहरान में तैनात विश्लेषकों का कहना है कि ईरान अपनी सबसे उन्नत मिसाइलों, जैसे कि 'हैदर' (Heidar) मिसाइलों का उपयोग करके इजरायली क्षेत्रों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है.
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों में अब तक कम से कम 1,444 लोगों की मौत हो चुकी है और 18,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं. तेहरान, करज, इस्फहान और तबरीज जैसे प्रमुख शहरों पर लगातार हवाई हमले जारी हैं.
शांति की संभावनाओं को खारिज करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान को अब अपने हथियार डाल देने चाहिए और जो कुछ बचा है उसे बचाने की कोशिश करनी चाहिए.
उन्होंने किसी भी प्रकार के समझौते की संभावना को यह कहते हुए नकार दिया कि ईरान समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है, लेकिन वे ऐसा कोई सौदा स्वीकार नहीं करेंगे. इस टकराव ने न केवल मध्य पूर्व को बल्कि पूरी दुनिया को एक संभावित ऊर्जा और सुरक्षा संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है.