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अन्याय लंबा हो सकता है, लेकिन स्थायी नहीं- तस्लीमा नसरीन

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01 अग. 2026, 07:14 PM 2 मिनट में पढ़ें 5

तसलीमा नसरीन
तसलीमा नसरीन

कोलकाता । डेस्क: निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने लगभग 19 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोलकाता में कदम रखा है. रवींद्र सदन में आयोजित एक नागरिक अभिनंदन समारोह में उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि कोलकाता वापसी यह साबित करती है कि "अन्याय भले ही लंबा खींचे, लेकिन वह कभी स्थायी नहीं हो सकता". 


इस दौरान उन्होंने बिना किसी राजनीतिक बयानबाजी के महिलाओं के अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. कार्यक्रम के दौरान तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरपंथ की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन से ही धार्मिक कट्टरता को करीब से देखा है और हमेशा इसके खिलाफ आवाज उठाई है. 

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उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन बांग्लादेश में महिलाएं, अल्पसंख्यक और लेखक बिना किसी डर के जीवन जी सकेंगे. नसरीन ने यह भी दर्द बयां किया कि भले ही यूरोप ने उन्हें नागरिकता और रहने की जगह दी, लेकिन दुख इस बात का है कि वे न तो बांग्लादेश और न ही बंगाल में अपने लिए एक छोटा सा आशियाना ढूंढ सकीं.  


कार्यक्रम में मौजूद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तस्लीमा नसरीन का राज्य में स्वागत किया और उन्हें पूर्ण सुरक्षा का भरोसा दिलाया. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और धमकी व डर का दौर अब खत्म हो चुका है. उन्होंने नसरीन को जब चाहे तब बंगाल आने का खुला न्योता भी दिया.  


गौरतलब है कि वर्ष 2007 में अपनी आत्मकथा 'द्विखंडितो' (Dwikhandito) के कुछ अंशों को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वाममोर्चा सरकार के दबाव में नसरीन को कोलकाता छोड़ना पड़ा था. दो दशकों बाद उनकी इस पहली सार्वजनिक उपस्थिति ने एक बार फिर स्वतंत्रता और अधिकारों की बहस को ताजा कर दिया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP