घुसपैठियों को वोट का हक नहीं: अमित शाह का विपक्ष पर हमला
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि देश के मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुनने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों का है, अवैध घुसपैठियों का नहीं. उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे भोले वोटरों की सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया का विरोध करके घुसपैठियों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं. शाह ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों का हवाला देते हुए दावा किया कि जनता अवैध प्रवास को बर्दाश्त नहीं करती.
गुजरात के भुज में बीएसएफ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, "बीएसएफ लगातार घुसपैठ रोकने का काम कर रही है. यह न केवल देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को दूषित होने से बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है." उन्होंने विपक्ष पर SIR को बाधित करने का इल्जाम लगाया और चेतावनी दी, "जो दल SIR का विरोध कर रहे हैं, वे घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा."
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और केंद्र के बीच तनाव चरम पर है. बिहार के बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान शुरू हो चुका है, जिनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे पांच राज्य शामिल हैं जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. विपक्ष का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया उद्देश्यपूर्ण तरीके से चलाई जा रही है, जो वोटर सूची में हेरफेर का खतरा पैदा कर सकती है. साथ ही, समयसीमा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. केंद्र का पक्ष है कि यह नकली वोटरों को पकड़ने के उद्देश्य से की जा रही है, जो लोकतंत्र को मजबूत बनाएगी. इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चल रहा है, जहां विपक्ष ने प्रक्रिया रोकने की मांग की है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR पर रोक लगाने की मांग की. पत्र में उन्होंने इसे 'परिकल्पनाहीन और खतरनाक' बताया, साथ ही प्रशिक्षण की कमी, दस्तावेजों में अस्पष्टता और BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) पर अतिरिक्त दबाव का जिक्र किया. ममता ने कहा कि यह प्रक्रिया संरचनात्मक रूप से दोषपूर्ण है और BLO के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है. हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी तक पत्र का जवाब नहीं दिया है.
शाह ने जोर देकर कहा कि SIR से वोटर सूची शुद्ध होगी और केवल सच्चे नागरिक ही लोकतंत्र की कमान संभाल सकेंगे. उन्होंने विपक्ष को सतर्क किया कि घुसपैठियों के हित में काम करने की कोशिशें नाकाम होंगी. राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो गई है, जहां केंद्र का तर्क और विपक्ष की आलोचना आमने-सामने हैं. आने वाले चुनावों से पहले यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का केंद्रबिंदु बन चुका है.
ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त को SIR पर पत्र: मुख्य बिंदु और आपत्तियां
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखा, जिसमें राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई है. ममता ने इस प्रक्रिया को "अनियोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक" करार दिया, जो राज्य में व्यापक अव्यवस्था पैदा कर रही है. पत्र में उन्होंने SIR के कारण उत्पन्न मानवीय क्षति पर गंभीर चिंता जताई और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अस्वीकार्य बताया.
पत्र के मुख्य बिंदु
SIR की आलोचना: ममता ने लिखा कि यह प्रक्रिया "दबावपूर्ण" है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) पर अत्यधिक बोझ डाला गया है. BLO को असहनीय काम का दबाव झेलना पड़ रहा है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य खतरे में है.
दस्तावेजों में भ्रम: दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकताओं में अस्पष्टता है, जिससे BLO को घर-घर जाकर सत्यापन करना कठिन हो रहा है. इससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.
मानवीय क्षति का उदाहरण: पत्र में जालपाईगुड़ी जिले में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (जो BLO के रूप में कार्यरत थी) की आत्महत्या का जिक्र किया गया. ममता ने कहा, "यह मानव लागत किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अस्वीकार्य है." उन्होंने कई अन्य मौतों और तनावपूर्ण घटनाओं का भी उल्लेख किया.
खतरनाक स्थिति: SIR को "खतरनाक स्टेज" पर पहुंच चुका बताया, जहां अधिकारी और आम नागरिक दोनों जोखिम में हैं. ममता ने कहा कि उन्होंने पहले भी इसकी चिंताएं व्यक्त की थीं, लेकिन अब हालात बिगड़ चुके हैं.
ममता की मांगें
SIR प्रक्रिया को तत्काल स्थगित करने की अपील.
प्रक्रिया की कार्यप्रणाली, समयसीमा और संरचना की पूर्ण पुनर्समीक्षा करने का अनुरोध.
BLO और अन्य अधिकारियों पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की सिफारिश.
पत्र के बाद भाजपा ने तीखा पलटवार किया. भाजपा नेता अमित मालवीया ने इसे टीएमसी की "हताशा" करार दिया और कहा कि SIR से फर्जी वोटर हट रहे हैं, जो ममता को परेशान कर रहा है. वहीं, भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को अलग पत्र लिखकर SIR जारी रखने की मांग की. यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन चुका है, खासकर 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों को देखते हुए.