छत्तीसगढ़ के सरगुजा में खुला देश का अनोखा 'छेरी बैंक'
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत कुंवरपुर ग्राम पंचायत में जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के साझा प्रयासों से 'छेरी बैंक' (बकरी बैंक) की अभिनव शुरुआत की गई है. इस अनोखे बैंक की खासियत यह है कि यहाँ रुपयों का लेनदेन नहीं, बल्कि बकरियों का प्रबंधन और विनिमय किया जाता है.
जिला पंचायत सीईओ विनय अग्रवाल के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और सीमांत वर्ग की महिलाओं को पशुपालन के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है.
इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मात्र 3,000 रुपये के सदस्यता शुल्क पर चार उन्नत नस्ल की बकरियां ऋण के रूप में दी जाती हैं. इस शुल्क के बदले 'पशु सखी' अगले 40 महीनों तक बकरियों के टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, कृमि मुक्ति और कृत्रिम गर्भाधान की जिम्मेदारी संभालती हैं.
बैंक की प्रबंधक अनीता ने बताया कि 40 महीनों के अंतराल में इन चार बकरियों से होने वाली संतति में से केवल 16 मेमने बैंक को किस्तों के रूप में वापस करने होंगे, जबकि शेष सभी मेमने लाभार्थी महिला के पास रहेंगे.
अधिकारियों के अनुसार, सांख्यिकीय रूप से एक बकरी अपने पूरे जीवन चक्र में लगभग 25 मेमने देती है, जिससे लाभार्थी को 100 तक मेमने मिल सकते हैं और 16 वापस करने के बाद लगभग 84 मेमने उनका शुद्ध लाभ होंगे.
योजना की लाभार्थी सुमित्रा सिंह का कहना है कि एक बकरा बाजार में 8,000 से 10,000 रुपये तक में बिकता है, जिससे उनकी आय आसानी से एक लाख रुपये से ऊपर चली जाएगी.
वर्तमान में इस बैंक में झारखंड के गुमला और उत्तर प्रदेश से लाई गई उच्च गुणवत्ता वाली 'बंगाल ब्रीड' की बकरियां रखी गई हैं.
सरगुजा का यह मॉडल ओडिशा की सफलता से प्रेरित है, जिसे अब छत्तीसगढ़ की महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने के लक्ष्य के साथ लागू किया जा रहा है. आने वाले समय में यहाँ बकरियों की अन्य उन्नत नस्लों को भी शामिल करने की योजना है, ताकि सरगुजा का यह छेरी बैंक प्रदेश में पशुपालन और महिला उद्यमिता का एक प्रमुख केंद्र बन सके.