हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़े भारतीयो पर संसद में बवाल
हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़े भारतीय अमेरिका से भारत पहुंचे
दिल्ली | डेस्कः अमेरिका में बिना वैध दस्तावेज़ों के रह रहे 100 से अधिक भारतीयों को लेकर अमेरिकी सेना का एक विमान बुधवार को अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा. जिसके बाद से देश की राजनीति गर्मा गयी है.
विपक्ष सरकार से इस मुद्दे को लेकर जबाव तलब कर रहा है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया में भी लोग अमेरिकी सरकार के रवैये का विरोध करते हुए मोदी सरकार को घेर रहे हैं.
इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बयान दिया कि यह सभी देशों की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने नागरिकों को वापस लें अगर वे विदेश में अवैध रूप से रह रहे हैं.
उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब उनकी नागरिकता की पुष्टि स्पष्ट रूप से की जाए. यह कोई विशेष नीति नहीं है, न ही केवल भारत की ओर से अपनाई जाने वाली नीति है.
यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक सामान्य रूप से स्वीकृत सिद्धांत है. निर्वासन की प्रक्रिया कोई नई नहीं है, यह कई वर्षों से चली आ रही है. यह केवल एक देश पर लागू होने वाली नीति नहीं है.
हथकड़ियों और बेड़ियों में लाए गए आप्रवासी
अमेरिका के बॉर्डर पेट्रोल के प्रमुख चीफ़ माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने भारतीय आप्रवासियों के निर्वासन को लेकर एक ट्वीट किया है और कुछ वीडियो फ़ुटेज भी साझा किए हैं, जिसमें साफ़ दिखता है कि आप्रवासियों के हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ी लगी हुई है.
ट्वीट में लिखा है, यूएसबीपी और सहयोगियों ने सफ़लतापूर्वक अवैध एलियंस को भारत भेजा, जो सैन्य ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए अब तक की सबसे सुदूर की निर्वासन उड़ान है. यह मिशन आव्रजन क़ानूनों को लागू करने और तेजी से निर्वासन सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है.
विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा
कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा "नरेंद्र मोदी ने अपने मित्र ट्रंप के लिए चुनावी कैंपेन किया था. लेकिन मोदी जी के मित्र ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही सबसे पहला हमला हिंदुस्तानियों पर ही किया है.
क्या हिंदुस्तान की सरकार के पास अपने लोगों को देश वापस लाने के लिए एक प्लेन नहीं था?"
प्रियंका गांधी ने कहा कि बहुत बात की गई थी कि मोदी जी और ट्रंप जी बहुत अच्छे मित्र हैं, फिर मोदी जी ने ऐसा क्यों होने दिया? क्या इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है कि उनको हथकड़ियां और बेड़ियां पहनाकर भेजा जाए? ये कोई तरीका है. प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए.
तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि "यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है. मेरा मानना है कि इस मुद्दे पर भारत सरकार को उच्च असहमति व्यक्त करनी चाहिए."
वहीं शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "जिस तरीक़े से उन्हें हाथ में हथकड़ियां और पैरों में कड़ियां लगाकर भेजा गया, उन्हें वॉशरूम तक नहीं जाने दिया गया, मैं अमेरिका को याद दिलाना चाहूंगी कि ये वहां के अपराधी नहीं हैं."
उन्होंने कहा, “जिस बेइज़्ज़ती से उन्हें भेजा गया है, ये देश को स्वीकार्य नहीं है. इसकी ज़िम्मेदारी देश की सरकार को लेनी पड़ेगी.”
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन करने के साथ ही दोनों ही सदनों में इस मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग की है.
नमस्ते ट्रंप से लेकर अबकी बार ट्रंप सरकार तक
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनकी औऱ प्रधानमंत्री मोदी की दोस्ती के खूब चर्चे थे और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के देश में जाकर सार्वजनिक सभाओं में हिस्सा लेते हुए एक-दूसरे का समर्थन किया.
सितंबर 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम के दौरान ट्रंप की उपस्थिती में मोदी ने कहा था, 'अबकी बार ट्रंप सरकार.' इसके अगले साल ही अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले थे.
फ़रवरी 2020 में अहमदाबाद में 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इन सबके बावजूद अवैध प्रवासियों के मामले में ट्रंप प्रशासन का भारत के साथ रवैया अन्य देशों की तरह ही है.
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की ट्रंप से इसी महीने मुलाक़ात की बातें कही जा रही हैं.
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद से ये अमेरिका में रह रहे भारतीयों के निर्वासन की पहली खेप है.
यह कोई पहली कार्यवाही नहीं
अमेरिका में अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने की कार्यवाही पहली बार नहीं हो रही है. इसके पहले भी अमेरिकी प्रशासन ने लाखों लोगों को निर्वासित किया है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 में एक साल में सर्वाधिक 2,300 भारतीयों को निर्वासन हुआ. 2024 में (सितंबर तक) 1,000 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किया गया था.
पिछले साल अक्तूबर में ही अमेरिका इमिग्रेशन एंड कस्टम एनफ़ोर्समेंट ने 100 से अधिक नागरिकों को एक चार्टर्ड फ़्लाइट से भारत भेजा था.
अमेरिका ने कहा है कि उसने 18,000 भारतीय नागरिकों को चिह्नित किया है, जिनके बारे में उसका मानना है कि उन्होंने अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश किया है.
निर्वासन से ज्यादा उसके तरीके पर सवाल
विदेश मंत्री जयशंकर नियमों का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर भले ही कह रहे हैं कि यह वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया है. लेकिन निर्वासन की प्रक्रिया से ज्यादा अमेरिका के तरीके व भारत की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं.
मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि जिन नागरिकों को 40 घंटे तक हथकड़ी व पैरों में बेड़िया बांधकर सेना के मालवाहक विमान से भारत लाया गया उनमें से किसी का भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.
उन्हें सामान्य तरीके से भी निर्वासित किया जा सकता था. यात्री विमान के माध्यम से जैसा कि पहले भी होता आ रहा है.
रोटी की जुगाड़ में गये इन यात्रियों ने अपने घर पहुंचकर दर्दनाक आपबीती भी सुनाई है कि किस तरह उन्हें न खाने के वक्त और न ही वॉशरूम जाने के लिए जंजीरों को खोला गया.
वे घिसटते हुए वॉशरूम गये. यह अमेरिकी प्रशासन के अमानवीय व्यौहार को दिखाता है.
भारत शांत बना रहा
भारत के अलावा अमेरिका से ब्राज़ील, ग्वाटेमाला, पेरू और होंडूरास के लोगों को भी सेना के विमान से वापस भेजा गया है.
सेना के विमान से अवैध प्रवासियों को उनके देश भेजने के फ़ैसले को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की निंदा भी की गई है. कोलंबिया के राष्ट्रपति ने अमेरिका के विमान को अपने देश में नहीं उतरने दिया था.
इसके बाद कोलंबिया का विमान अमेरिका गया और अपने लोगों को वापस लेकर आया. कोलंबिया ने कहा कि वह अपने देश के नागरिकों की गरिमा का सम्मान करते हैं.
सैन्य विमानों में जबरन लोगों को बैठाकर दूसरे देश की ज़मीन पर उतरने को संप्रभुता से जोड़कर भी देखा जाता है. मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इस मुद्दे को लेकर तीखा बयान दिया था.
उन्होंने कहा कि वे अपनी सीमा के अंदर ये हरकत कर सकते हैं. जब मेक्सिको की बात आती है तो हम हमारी संप्रभुता की रक्षा करेंगे और समन्वय के लिए बातचीत की संभावनाएं तलाशेंगे.
इस मामले पर भारत शांत रहा. उसने किसी तरह की कोई खास प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की.