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भारत डोपिंग और प्रतिबंधित दवाओं का वैश्विक केंद्र: विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी

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17 अप्रै. 2026, 01:58 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

विटोल्ड बांका
विटोल्ड बांका

नई दिल्ली । डेस्क: विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के प्रमुख विटोल्ड बांका ने भारत में प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं (PEDs) के अवैध उत्पादन और बढ़ते डोपिंग मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. नई दिल्ली के दौरे पर आए बांका ने स्पष्ट किया कि भारत वर्तमान में दुनिया में इन अवैध दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक बनकर उभरा है, जो वैश्विक खेल जगत की विश्वसनीयता और एथलीटों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है. 


विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी प्रमुख ने बताया कि इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उनकी टीम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और साइबर अपराध सेल जैसी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है. विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी का मुख्य उद्देश्य एथलीटों के बजाय उन बड़े आपूर्तिकर्ताओं और आपराधिक नेटवर्क पर नकेल कसना है, जो पर्दे के पीछे से इन दवाओं की तस्करी कर रहे हैं.

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विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के जांच प्रमुख गुंटर यंगर ने इस रणनीति को 'टॉप-डाउन' दृष्टिकोण बताया है. उनके अनुसार, पिछले 25 वर्षों से खेल जगत केवल एथलीटों के परीक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा था, लेकिन अब रणनीति बदलने की जरूरत है. चूंकि डोपिंग परीक्षणों में पकड़े जाने की दर 1 प्रतिशत से भी कम है, इसलिए अब कोचों, डॉक्टरों और उन बिचौलियों को लक्षित किया जाएगा जो खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाएं उपलब्ध कराते हैं. 


इंटरपोल समर्थित 'ऑपरेशन अपस्ट्रीम' की सफलता का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि दुनिया भर में 250 छापों के माध्यम से लगभग 90 टन प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गई हैं और 88 अवैध लैब नष्ट की गई हैं. भारत में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है क्योंकि देश की विशाल जनसंख्या और उभरती खेल महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए यह एक साझा हित का विषय है.


भारत के लिए सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि वह लगातार तीन वर्षों से वैश्विक डोपिंग उल्लंघन सूची में शीर्ष पर बना हुआ है. दिसंबर 2025 में प्रकाशित विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) द्वारा एकत्र किए गए 7,113 नमूनों में से 260 सकारात्मक पाए गए. 


हालांकि, विशेषज्ञों ने इसे 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और 2036 ओलंपिक के भारत के सपने के लिए एक बड़ा झटका माना है, लेकिन विटोल्ड बांका ने थोड़ा अलग नजरिया पेश किया. 

उन्होंने कहा कि सकारात्मक मामलों की अधिक संख्या का मतलब यह नहीं है कि भारत अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी नहीं कर सकता. बल्कि, यह इस बात का संकेत है कि देश की डोपिंग रोधी प्रणाली सक्रिय रूप से काम कर रही है और चोरी पकड़ रही है. 


बांका के अनुसार, चिंता तब होनी चाहिए जब सकारात्मक मामलों की संख्या अचानक कम हो जाए, क्योंकि वह डोपिंग रोधी एजेंसी की विफलता का संकेत होगा. वर्तमान में, प्राथमिकता भारत के कानूनी ढांचे और खेल प्रणाली को इतना मजबूत बनाने की है कि वह वैश्विक मानकों पर खरी उतर सके और भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए एक स्वच्छ खेल वातावरण तैयार कर सके.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP